ट्विशा सुसाइड केस: गिरफ्तारी से बचने हाईकोर्ट पहुंचे पति समर्थ सिंह, कल होगी अग्रिम जमानत पर सुनवाई

भोपाल: भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में पुलिस की पकड़ से दूर चल रहे उनके पति समर्थ सिंह ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी दांवपेंच तेज कर दिए हैं। जिला अदालत से तगड़ा झटका लगने के बाद अब समर्थ सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट में दायर की गई इस अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार (22 मई) को सुनवाई होनी तय हुई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
जिला अदालत से लगा था झटका, मां को मिल चुकी है राहत
गौरतलब है कि इससे पहले भोपाल की जिला अदालत समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर चुकी है। जिला कोर्ट से राहत न मिलने के बाद ही उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली है। हालांकि, इस मामले में सह-आरोपी और समर्थ सिंह की मां गिरीबाला सिंह को निचली अदालत से पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है। फिलहाल पुलिस समर्थ सिंह की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाने में व्यस्त है।
परिजनों के आरोप गंभीर, बचाव पक्ष ने बताया बेबुनियाद
एक तरफ जहां ट्विशा शर्मा के मायके वालों ने समर्थ सिंह और उनके परिवार पर बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं बचाव पक्ष ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
समर्थ सिंह के वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“ट्विशा के परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से काल्पनिक और बेबुनियाद हैं। 12 मई की रात को हुई इस दुखद घटना से पहले ट्विशा ने न तो कोई बयान दर्ज कराया था और न ही मौके से कोई सुसाइड नोट मिला है। लड़की के परिजनों ने इस मामले को जबरन तूल दिया है और यहां तक कि शव का अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया था।”
स्थानीय पुलिस पर उठाए सवाल, अब सीबीआई जांच की मांग
मामले में नया मोड़ तब आया जब बचाव पक्ष के वकील ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और स्थानीय जांच की निष्पक्षता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एडवोकेट मृगेंद्र सिंह का कहना है कि मौजूदा हालातों को देखते हुए राज्य में इस केस की पारदर्शी जांच होना मुमकिन नहीं लग रहा है।
उन्होंने बताया कि वे जल्द ही हाईकोर्ट में एक अलग याचिका दायर करने जा रहे हैं, जिसमें इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने साफ किया कि भोपाल कोर्ट ने मृतका के दोबारा पोस्टमार्टम कराने की परिजनों की मांग को खारिज कर दिया था, क्योंकि पहला पोस्टमार्टम पहले ही देश के प्रतिष्ठित संस्थान AIIMS के डॉक्टरों की टीम द्वारा पूरी पारदर्शिता और वीडियोग्राफी के साथ किया जा चुका है।
अब देखना होगा कि शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से फरार चल रहे समर्थ सिंह को राहत मिलती है या उनकी मुश्किलें और बढ़ती हैं।







