मृत्यु के बाद भी ‘अमर’ हुए अमोल : ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ दी गई विदाई

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ मानवता की सेवा और चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से ग्राम कर्रापुर निवासी स्व. अमोल रजक (68 वर्ष) के परिजनों ने उनके पार्थिव शरीर को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) के एनाटॉमी विभाग को दान कर एक मिसाल पेश की है। सोमवार को बीएमसी परिसर में पूर्ण सम्मान के साथ देहदान की प्रक्रिया संपन्न हुई।
शिक्षा और अनुसंधान के काम आएगी देह
स्व. अमोल रजक के पुत्र लखन व भरत रजक और पत्नी अशोक रानी रजक ने उनकी इच्छानुसार पार्थिव देह को चिकित्सा शिक्षा हेतु सौंपने का निर्णय लिया। इस महान त्याग के लिए बीएमसी के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष ने परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देहदान से भावी चिकित्सकों को सीखने और अनुसंधान करने में अमूल्य सहायता मिलती है।
उल्लेखनीय है कि शासन के निर्देशानुसार बीएमसी में यह आठवां अवसर है, जब किसी देहदाता को राजकीय सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। कार्यक्रम के अंत में पूरा महाविद्यालय परिवार इस पुण्य कार्य के लिए शोक संतप्त परिवार के प्रति नतमस्तक रहा। समाजोपयोगी इस महान कार्य के लिए स्व. अमोल रजक का नाम बीएमसी के इतिहास में सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा।







