उजड़े आशियाने के सदमे ने ली बुजुर्ग की जान, मालीखेड़ी में भारी तनाव के बीच हुआ अंतिम संस्कार

उजड़े आशियाने के सदमे ने ली बुजुर्ग की जान, मालीखेड़ी में भारी तनाव के बीच हुआ अंतिम संस्कार
भोपाल, यशभारत। राजधानी के पॉलिटेक्निक चौराहे के पास स्थित मानस भवन के पीछे की 70 साल पुरानी आदिवासी बस्ती को हटाना एक परिवार के लिए उम्र भर का दर्द बन गया है। जिला प्रशासन की बेदखली की कार्रवाई के दौरान सदमे में आई एक बुजुर्ग महिला ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतका का अंतिम संस्कार उसी मालीखेड़ी इलाके में किया गया, जहां शिफ्ट किए गए इन परिवारों का स्थानीय लोग और हिंदूवादी संगठन हिंसक विरोध कर रहे हैं।
कार्रवाई के दौरान ही बिगड़ी थी तबीयत
शनिवार को जब नगर निगम और जिला प्रशासन का अमला भारी पुलिस बल के साथ बस्ती हटाने पहुँचा, तो वहाँ चीख-पुकार मच गई। दशकों पुराने अपने घर को जमींदोज होते देख एक बुजुर्ग महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह प्रदर्शन के बीच ही बेहोश हो गईं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दो दिनों के संघर्ष के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि घर छिनने के गम और भविष्य की असुरक्षा ने उनकी जान ले ली।
मालीखेड़ी में दहशत का साया: ‘हाथों में तलवार, मन में डर
जिन 27 परिवारों को मालीखेड़ी के प्रधानमंत्री आवास योजना फ्लैट्स में शिफ्ट किया गया है, उनके लिए नई शुरुआत किसी डरावने सपने जैसी है। विस्थापितों का आरोप है कि रात के समय स्थानीय लोग और संगठनों के कार्यकर्ता तलवारें और लाठियां लेकर उनके घरों के बाहर घूम रहे हैं। शुरुआती घंटों में विरोधियों ने परिवारों को अपना सामान तक ट्रकों से उतारने नहीं दिया। स्थानीय लोगों की मांग है कि इन परिवारों का आपराधिक रिकॉर्ड जांचा जाए, जिससे विस्थापित खुद को अपमानित और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
विपक्ष हमलावर: यह विस्थापन नहीं अन्याय है
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा, प्रशासन ने न केवल गरीबों का आशियाना उजाड़ा, बल्कि इस अफरा-तफरी में उनका कीमती सामान भी गायब हो गया। बुजुर्ग महिला की मौत प्रशासन की संवेदनहीनता का परिणाम है।
वहीं, वार्ड 24 के कांग्रेस अध्यक्ष शोएब खान ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और पीड़ित परिवारों को सुरक्षा के साथ मुआवजा दिया जाए।
क्षेत्र के पार्षद विकास पटेल ने स्वीकार किया कि पहले दिन शिफ्टिंग के दौरान दो पक्षों में विवाद और तीखी नोकझोंक हुई थी। हालांकि, उनका कहना है कि पुलिस वेरिफिकेशन की मांग के बाद स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है। इलाके में फिलहाल पुलिस बल तैनात है, लेकिन विस्थापित परिवारों की आंखों से न तो पुराने घर की यादों के आंसू सूख रहे हैं और न ही नई जगह पर सुरक्षा को लेकर डर कम हो रहा है।







