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कोई खुदको सुपरपॉवर समझने की भूल न करे, राजनीतिक नियुक्तियों में भाजपा का कड़ा संदेश

जहां पार्टी मजबूत वहां कॉडर पर जोर, जहां कमजोर वहां नए को मौका

भोपाल ( आशीष सोनी )। भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों भोपाल से दिल्ली तक राजनीतिक नियुक्तियों की हलचल है। जल्दबाजी के बजाय आहिस्ता आहिस्ता भरे जा रहे पदों के पीछे पार्टी के रणनीतिकारों की सोच सत्ता संतुलन को साधने के साथ हाशिए पर जा चुके मूल कार्यकर्ताओं को एक्टिव करना है। दरअसल नियुक्तियों के पीछे पूरी फील्डिंग अगले साल यानि 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए जमाई जा रही है। इस बात का खास ध्यान रखा जा रहा है कि किसी भी अंचल में कोई दिग्गज नेता खुद को सुपरपॉवर न समझने पाए। नियुक्तियों में क्षत्रपों के धुर विरोधियों को मिल रही तवज्जो इसी योजना का प्रमाण है। राज्यों में लगातार अपना वर्चस्व बढ़ा रही भाजपा अब नई गाइड लाइन पर काम कर रही है। जिन इलाकों में पार्टी का जनाधार कमजोर है वहां वह अन्य दलों से आए और पार्टी में नए शामिल हुए कार्यकर्ताओं को पदों से नवाजने में हिचक नहीं रही, लेकिन जहां पार्टी मजबूत स्थिति में है वहां वह कॉडर के साथ चल रही है। मतलब साफ है वहां पार्टी की विचारधारा में पोषित मूल कार्यकर्ताओं को पावर में लाया जा रहा है, जो अब तक खुदको उपेक्षित महसूस कर रहे थे।

राजनीतिक रूप से मध्यप्रदेश की गिनती पार्टी की मजबूत स्थिति वाले राज्यों में होती है। संघ भी इसे अपनी प्रयोगशाला मानता है। एमपी के संगठन से निकलने वाले संदेश की धमक भी पूरे देश में होती है, इसलिए पार्टी यहां हर निर्णय अपनी मूल विचारधारा को ध्यान में रखकर लेती है। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट के बीच निगम मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का सिलसिला शुरू तो हुआ लेकिन पार्टी इस काम कोई जल्दबाजी नहीं दिखला रही। प्रदेश के तमाम हिस्सों की सियासी परिस्थितियों को भांपते हुए फैसले किए जा रहे है। ग्वालियर चम्बल संभाग में हुई नियुक्तियों से पार्टी ने यही संदेश देने का काम किया है कि कोई भी दिग्गज इस मुगालते में न रहे कि वह अपने इलाके में अपने हिसाब से पार्टी को हांक लेगा। गौरतलब है कि गुना-शिवपुरी के पूर्व सांसद केपी यादव को मध्य प्रदेश राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है जबकि वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत को वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। दोनों ही नेता सिंधिया विरोधी खेमे के माने जाते रहे हैं।

पार्टी का साफ संदेश, सभी को साथ लेकर चलेगी

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा को लगता है कि ग्वालियर-चंबल संभाग में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का वर्चस्व जरूर है, लेकिन कांग्रेस से आए नेताओं और पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बना रहे। निगम-मंडल में नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने संदेश दिया है कि वह सभी को साथ लेकर चलेगी। विरोधियों को पद देकर भाजपा ने सिंधिया समर्थकों और उनके विरोधियों के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश की है। इन नई नियुक्तियों को लेकर जानकारों का कहना है कि पार्टी का संकेत है कि ग्वालियर-चंबल की राजनीति में सिंधिया अहम हैं, लेकिन संगठन सर्वोपरि है और सभी का सम्मान होगा। गुना-शिवपुरी संसदीय सीट पर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव को इस संसदीय क्षेत्र से टिकट नहीं मिला और सिंधिया स्वयं यहां से सांसद निर्वाचित हुए। अब यादव को निगम में अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने सियासी संतुलन बनाने का संदेश दिया

यादव – खंडेलवाल की जोड़ी साध रही समीकरण

प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी प्रदेश के सभी अंचलों के समीकरणों को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है। निगम और मंडल के साथ प्राधिकरण तथा अन्य राजनीतिक नियुक्तियों में उन नेताओं का चयन किया जा रहा है जो आने वाले चुनाव में पार्टी के मददगार हो सकते हैं। पार्टी के पिछले प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल में पूरे समय आरोप लगते रहे कि नया नेतृत्व तैयार करने के फेर में पुराने और पार्टी के प्रति समर्पित नेताओं को किनारे लगा दिया गया। हेमंत खंडेलवाल नए और पुराने नेताओं की इस लकीर पर बारीक नजर रख रहे है। युवाओं को तो संगठन में जगह मिल ही रही है, मूल विचारधारा के पुराने नेताओं को भी एडजस्ट किया जा रहा है। निगम मंडल और प्राधिकरण में अब तक जो नाम सामने आए हैं उन्हें देखकर प्रदेश नेतृत्व की मंशा को आसानी से समझा जा सकता है।

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