29 अप्रैल को प्रदेश के सभी जिलों की मैराथन समीक्षा, मुख्य सचिव लेंगे हर विभाग की रिपोर्ट; कमजोर जिलों पर सख्ती के संकेत

भोपाल यश भारत। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक कसावट और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्य शासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है। इसी क्रम में 29 अप्रैल 2026 को मंत्रालय, भोपाल में दोपहर 12 बजे से प्रदेश के सभी जिलों की व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे, जिसमें शासन के सभी प्रमुख विभागों के कामकाज, योजनाओं की प्रगति और जिलों के प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन किया जाएगा। �
राज्य से लेकर जिले तक जुड़ेंगे अधिकारी
बैठक में राज्य स्तर के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव मंत्रालय में उपस्थित रहेंगे, जबकि सभी संभागीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे।
शासन ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे तय प्रारूप में अद्यतन जानकारी के साथ पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण तैयार करें और हर बिंदु पर जिलों की वास्तविक स्थिति सामने रखें।
स्लाइड आधारित प्रेजेंटेशन, हर बिंदु पर जवाबदेही
बैठक में प्रत्येक विभाग को दो स्लाइड में जानकारी प्रस्तुत करनी होगी—
पहली स्लाइड में प्रमुख मुद्दे, समस्याएं, निर्देश और नए निर्णय
दूसरी स्लाइड में जिलों की ग्रेडिंग (ग्रीन, येलो, रेड)
जहां संभव हो, राज्य की रैंकिंग भी प्रदर्शित की जाएगी, जिससे जिलों के बीच प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही तय हो सके।
कानून व्यवस्था: महिला सुरक्षा से साइबर क्राइम तक फोकस
कानून व्यवस्था की समीक्षा में महिला अपराधों की रोकथाम, नशे के कारोबार पर कार्रवाई, साइबर अपराध से बचाव के उपाय और सड़क सुरक्षा जैसे अहम विषय शामिल हैं।
इसके अलावा अनुसूचित जाति-जनजाति के विरुद्ध अपराधों की स्थिति और नए आपराधिक कानूनों के प्रचार-प्रसार की भी समीक्षा की जाएगी।
सुशासन: राजस्व और शिकायतों पर कड़ी नजर
राजस्व मामलों में लंबित नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी।
सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी अधिनियम और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि आम नागरिकों को समय पर सेवाएं मिल सकें।
स्वास्थ्य और पोषण: कुपोषण, टीबी और मातृ स्वास्थ्य प्राथमिकता
स्वास्थ्य क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार, गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच, एनीमिया नियंत्रण, टीबी स्क्रीनिंग और पोषण योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा होगी।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए किए गए प्रयासों का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
ग्रामीण विकास: पानी, आवास और रोजगार योजनाएं केंद्र में
पंचायत एवं ग्रामीण विकास के तहत पेयजल आपूर्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल गंगा संवर्धन अभियान और स्वयं सहायता समूहों की प्रगति पर चर्चा होगी।
इसके साथ ही मनरेगा और जनजातीय क्षेत्रों में चल रही योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
शिक्षा: नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट घटाने पर जोर
शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, ड्रॉपआउट कम करने, आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति और साक्षरता कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी।
छात्रों को पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर भी जांच के दायरे में रहेगा।
अन्य अहम मुद्दे भी एजेंडे में शामिल
बैठक में कृषि उपार्जन (गेहूं, चना, मसूर), वन संरक्षण, पराली जलाने की घटनाएं, डिजिटलीकरण और जनगणना जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
जिलों की ग्रेडिंग से तय होगी स्थिति
बैठक की खास बात यह है कि जिलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा जाएगा—
🟢 ग्रीन: उत्कृष्ट प्रदर्शन
🟡 येलो: औसत प्रदर्शन
🔴 रेड: कमजोर प्रदर्शन
विभिन्न जिलों की योजनाओं में प्रगति प्रतिशत भी समीक्षा का आधार बनेगा, जिससे स्पष्ट होगा कि कौन-से जिले लक्ष्य के करीब हैं और कौन पीछे।
टाइम स्लॉट के अनुसार होगी समीक्षा
बैठक का समय 12 बजे से 2 बजे तक तय किया गया है, जिसमें अलग-अलग विभागों के लिए समय निर्धारित है—
कानून व्यवस्था
सुशासन
स्वास्थ्य
ग्रामीण विकास
शिक्षा
अन्य विभाग
इस क्रम में सभी विभागों से जवाब लिया जाएगा।
सख्त संदेश: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
शासन के इस कदम को साफ संकेत माना जा रहा है कि अब योजनाओं में लापरवाही और धीमी प्रगति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक के बाद कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों के लिए विशेष निर्देश और कड़ी मॉनिटरिंग की संभावना जताई जा रही है।
यह समीक्षा बैठक न केवल योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाएगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूत करेगी। आने वाले समय में इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति पर देखने को मिल सकता है।






