मेरा यादगार केसः पहले गला घोंटा, फिर चाकू से रेता; लाश के पास बैठकर कातिल ने डाला सुसाइड स्टेटस

मेरा यादगार केसः पहले गला घोंटा, फिर चाकू से रेता; लाश के पास बैठकर कातिल ने डाला सुसाइड स्टेटस
जानिए टीआई गौरव सिंह दोहर ने कैसे किया इस रूह कंपाने वाले केस का पर्दाफाश
अरविंद कुमार कपिल
भोपाल, यश भारत : राजधानी का टीटी नगर इलाका उस दिन दहल गया था, जब एक सिरफिरे आशिक ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। यह केस पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती था क्योंकि कातिल ने न सिर्फ हत्या की, बल्कि उसे आत्महत्या का रंग देने के लिए मृतका के ही मोबाइल से डिजिटल जाल बुना। पेश है थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के साथ यश भारत की विशेष बातचीत।
सवाल-जवाब का सिलसिला
सवाल: गौरव जी, आपकी पुलिसिंग का सफर एम.बी.एम. कॉलेज से शुरू हुआ। वहां से पुलिस मुख्यालय पास ही है, क्या वहीं से वर्दी का सपना जागा?
जवाब: बिल्कुल। कॉलेज के दिनों में पीएचक्यू के पास से गुजरते हुए मैं अक्सर अधिकारियों को देखता था। तब मन में एक बात बैठ गई थी कि समाज में सवाल पूछने का असली हक सिर्फ पुलिस के पास है। बाकी कोई सवाल करता तो उसे उल्टा जवाब मिलता, लेकिन वर्दी की एक ‘पूछताछ’ में वो वजन होता है कि बड़े-बड़े गुनहगार कांप जाते हैं। इसी शक्ति ने मुझे खाकी की ओर खींचा।
सवाल: रोशनी हत्याकांड में आरोपी मुबीन ने पुलिस को गुमराह करने के लिए क्या चाल चली थी?
जवाब: मुबीन बेहद शातिर था। उसने रोशनी की सगाई कहीं और होने की रंजिश में पहले उसका गला दबाया और फिर चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद वह लाश के पास ही बैठा रहा और रोशनी के मोबाइल से स्टेटस डाला मैं खुदकुशी कर रही हूँ और पास में एक ब्लेड रख दी ताकि सब इसे सुसाइड समझें।
सवाल: सुना है कि परिवार की एक घबराहट ने इस केस को और पेचीदा बना दिया था?
जवाब: जी हाँ। सुबह जब रोशनी के भाई ने वह स्टेटस देखा और कमरा खोला, तो वहां बहन की लाश थी। परिवार इतना डर गया कि उन्हें लगा सुसाइड के कानूनी पचड़े में वे फंस जाएंगे, इसलिए भाई ने तुरंत वह स्टेटस डिलीट कर दिया। यहीं से सबसे बड़ा डिजिटल सबूत मिट गया और केस ब्लाइंड मर्डर जैसा लगने लगा।
सवाल: फिर आपने उस शातिर पड़ोसी को महज 24 घंटे में कैसे बेनकाब किया?
जवाब: अनुभव और तकनीकी जांच से। हमने उन 8 लोगों को ट्रैक किया जिन्होंने स्टेटस डिलीट होने से पहले उसे देख लिया था। मृतका के मोबाइल की तकनीकी जांच और मौके पर संघर्ष के निशानों ने साफ कर दिया कि यह सुसाइड नहीं, क्रूर हत्या है। घेराबंदी की गई तो मुबीन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
सवाल: अपराधियों के बीच आपका खौफ रहता है, लेकिन जनता आपको अपना रक्षक मानती है। यह संतुलन कैसे संभव है?
जवाब: मेरा मानना है कि पुलिस का काम डराना नहीं, बल्कि विश्वास जगाना है। पुलिस को अपराधियों के लिए वज्र की तरह कठोर और बेगुनाह जनता के लिए फूल की तरह कोमल होना चाहिए।
सवाल: नए युवाओं के लिए आपकी क्या सलाह है?
जवाब: हमेशा याद रखें तथ्यों के पीछे भागें, धारणाओं के पीछे नहीं। अपराधी चाहे खुद को कितना भी स्मार्ट समझे, वह कोई न कोई गलती जरूर करता है। आपकी नजर उसे पकड़ने के लिए पैनी होनी चाहिए।







