मेडिकल कॉलेज में प्रसूता की मौत पर भारी हंगामा: परिजनों ने लगाया ‘गलत इंजेक्शन’ का आरोप, अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) एक बार फिर सुर्खियों में है। यहाँ उपचार के दौरान एक प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का संगीन आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से प्रसूता की जान गई है। वहीं, बढ़ते तनाव को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे एक ‘क्रिटिकल केस’ करार दिया है।
परिजनों का फूटा गुस्सा: “लापरवाही ने ली जान”
घटना के बाद बीएमसी परिसर में चीख-पुकार और हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई। परिजनों का कहना है कि उन्होंने मरीज को बेहतर इलाज की उम्मीद में यहाँ भर्ती कराया था, लेकिन डॉक्टरों की कथित लापरवाही और गलत इलाज ने उनकी दुनिया उजाड़ दी। परिजनों ने मौके पर मौजूद स्टाफ से तीखी बहस की और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। बढ़ते विवाद को देखते हुए पुलिस को भी सूचना दी गई।
हंगामे और आरोपों के बीच बीएमसी के प्रभारी अधीक्षक डॉ. पुण्य प्रताप और स्त्री रोग प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. जागृति के हवाले से जनसंपर्क अधिकारी डॉ सौरभ जैन ने पक्ष रखते हुए कहा कि मरीज को बंडा से अत्यंत गंभीर स्थिति में रेफर कर यहाँ लाया गया था। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, प्रसूता उच्च रक्तचाप (High BP) की गंभीर समस्या से ग्रसित थी और उसे लगातार दौरे (Convulsions) पड़ रहे थे। स्थिति बिगड़ने पर उसे तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया गया था।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि डॉक्टरों की टीम ने महिला को बचाने के लिए हर संभव ‘लाइफ सेविंग’ उपाय किए थे, जिसकी जानकारी समय-समय पर परिजनों को भी दी जा रही थी। प्रबंधन का कहना है कि प्रोटोकॉल के तहत पुलिस को सूचना दे दी गई है और शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का खुलासा हो पाएगा। फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर बीएमसी की स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों के भरोसे पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।






