मध्य प्रदेशराज्य

11 वर्षीय छात्र की निर्मम हत्या : गला रेतकर नीले ड्रम में छिपाया, खून से सना मिला तकिया और कमरा

मासूम के लहू से लाल हुई बैंक कॉलोनी: जिस हाथ से सिलवटें मिटाता था पड़ोसी, उसी से रेत दिया शिवराज का गला

सतना यश भारत  |सोमवार की दोपहर जब बैंक कॉलोनी की गलियों में सूरज ढल रहा था, तब एक मां अपने 11 साल के कलेजे के टुकड़े, शिवराज को ढूंढ रही थी। उसे क्या पता था कि उसके घर से चंद कदम दूर, जिस पड़ोसी की दुकान पर मोहल्ला अपने कपड़ों की सिलवटें मिटाने जाता था, उसी बंद दरवाजे के पीछे उसके लाडले की जिंदगी का आखिरी सन्नाटा पसरा है।

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वो खामोश कमरा और खून के निशान

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कोलगवां पुलिस जब मथुरा रजक के घर का ताला तोड़कर भीतर दाखिल हुई, तो मंजर ऐसा था कि पत्थर दिल भी कांप जाए। दीवारों पर मासूम के संघर्ष के छींटे थे, वो बिस्तर जिस पर कभी बचपन करवटें लेता था, आज खून से सराबोर था। तलाशी थमी एक नीले प्लास्टिक के ड्रम पर। उस ड्रम के भीतर शिवराज का बेजान शरीर ठूंसा हुआ था। कक्षा 5वीं में पढ़ने वाला वो बच्चा, जो चंद घंटों पहले तक शायद अपनी मां के लौटने का इंतजार कर रहा होगा, अब इस दुनिया से जा चुका था।

अकेला पाकर किया ‘अपनों’ ने वार

शिवराज घर पर अकेला था। मां काम पर, बहन कॉलेज और भाई मजदूरी पर। आरोपी मथुरा रजक ने इसी सूनेपन का फायदा उठाया। बताया जा रहा है कि आरोपी का शिवराज के पिता रमेश से पुराना विवाद था। रंजिश बड़ों की थी, लेकिन कीमत उस मासूम ने चुकाई जिसे दुनिया की कड़वाहट का अहसास तक नहीं था। एक हंसिया, जो किसी के काम आता था, आज एक बच्चे की गर्दन पर मौत बनकर चला।

चीखती खामोशी और बेबस मां

शिवराज की मां आशा रजक का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार उस बंद दुकान की ओर देखती हैं, जहाँ से आरोपी मथुरा ने भागने से पहले ताला जड़ा था। पिता रमेश नासिक में मजदूरी कर परिवार का भविष्य बुन रहे थे, उन्हें क्या पता था कि घर लौटते ही उन्हें अपने बेटे के भविष्य की नहीं, बल्कि उसकी अर्थी की तैयारी करनी होगी।

पुलिस की गिरफ्त से बाहर हत्यारा

वारदात को अंजाम देकर आरोपी मथुरा रजक अपना मोबाइल बंद कर फरार है। पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं, लेकिन बैंक कॉलोनी के हर घर में आज एक ही सवाल है— क्या किसी की रंजिश इतनी बड़ी हो सकती है कि वो एक 11 साल के बच्चे के गले पर हंसिया चला दे?

शिवराज अब नहीं रहा, लेकिन पीछे छोड़ गया है खून से सनी वो दीवारें और एक सुबकता हुआ परिवार, जो शायद अब कभी चैन की नींद नहीं सो पाएगा।

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