नियमों को ताक पर रखकर मनमर्जी से बने केंद्र,देर रात गेहूं उपार्जन के लिए 47 सेंटरो की स्थापना,
आज से होना है उपार्जनकुंडम में भी यही खेल

जबलपुर, यश भारत। जिला प्रशासन द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन को लेकर मंगलवार की रात 47 केंद्रों की स्थापना की गई है और उसके साथ ही अधिकारियों बड़ा मर्जी का खेल भी सामने आ गया है। जानकारी के अनुसार कहीं एक स्थान पर ही सेंटरों की भरमार कर दी गई है तो कहीं 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में एक भी केंद्र नहीं बनाए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ प्राथमिकता सूची को भी दरकिनार करने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में उपार्जन के पहले ही विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है।
समिति से 20 किमी दूर करी स्थापना- लुहारी समिति को अपने क्षेत्र से 20 किलोमीटर दूर स्थित कालाहस्ती वेयरहाउस में खरीदी का काम दिया गया है जबकि बीच में बोरिया और नग्न समिति है सांची एक उपभोक्ता भंडार का भी खोला गया है। जहां यह केंद्र खोला गया है वह आरछा और सरोद समिति से नजदीक है। जबकि जहां लुहारी समिति है वो कटंगी और मझौली के आसपास आता है जहां कोई भी समिति नहीं है। ऐसे में 20 किलोमीटर दूर अन्य समितियां के क्षेत्र में केंद्र खोलने का और चित्र समझ कर पार है जबकि उसके मूल क्षेत्र में समितियां का टोटा है जबकि लुहारी समिति के कार्य क्षेत्र में ही लगभग 20000 मेट्रिक टन क्षमता के एक ही स्थान पर पांच गोदाम खाली पड़े हुए हैं।
कुंडम क्षेत्र की पड़रिया समिति को अपने क्षेत्र से 10 किलोमीटर दूर गुरु नानक वेयर हाउस में उपार्जन का काम दिया गया है जबकि समिति से 5 किलोमीटर की दूरी पर ही दूसरा वेयरहाउस उपलब्ध है और वहां पर द्वार प्रदाय का केंद्र भी स्थापित है जो की राशन वितरण की दृष्टि से सुविधाजनक है उसके बाद भी अधिकारियों द्वारा सुविधा का ध्यान न रखते हुए समिति स्थल से 10 किलोमीटर दूर केंद्र की स्थापना कर दी।
एक क्षेत्र में चार केंद्रों की स्थापना
सबसे बड़ा गोलमाल तो अधिकारियों द्वारा पाटन में किया गया है जहां 2 किलोमीटर के दायरे में चार केंद्रों की स्थापना कर दी गई है। जिसमें से एक केंद्र की स्थापना तो अगल-बगल में ही कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक पाटन नगर के आसपास
ही कुंवरपुर, सकरा, सरोद और सहसंन समितियो के केंद्र बनाकर दे दिए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ पाटन से आरछा के बीच में लगभग 20 किलोमीटर के क्षेत्र में एक भी केंद्र नहीं बनाया गया है।
प्राथमिकता सूची दरकिनार जो सूची जारी की गई है उसमें कई केंद्रों में प्राथमिकता को भी साइड लाईन किया गया है। जहां पर कुछ गोदाम
में पुराना और क्षतिग्रस्त अनाज रखा हुआ है उसके बाद भी वहां पर केंद्र बना दिए गए वहीं कुछ जगहों पर धर्म कांटे और बाउंड्री बाल की गलत जानकारी देकर भी बी केटेगिरी की गोदाम को ए केटेगिरी बनाकर केंद्र की स्थापना की गई, उसके अलावा कुछ जगहों पर लंबी घटी होने के बाद भी केंद्र बनाए गए है।







