राकेश बेदी की मसाज ने मंच पर बिखेरे हास्य के रंग, दर्शकों ने दिया स्टैंडिंग ओवेशन इंडीमून्स आर्ट्स फेस्टिवल के दूसरे दिन एकल नाटक ने बांधा समां, रंगमंच दिवस पर हुई सार्थक चर्चा

राकेश बेदी की मसाज ने मंच पर बिखेरे हास्य के रंग, दर्शकों ने दिया स्टैंडिंग ओवेशन
इंडीमून्स आर्ट्स फेस्टिवल के दूसरे दिन एकल नाटक ने बांधा समां, रंगमंच दिवस पर हुई सार्थक चर्चा
भोपाल यश भारत। रवीन्द्र भवन के हंसध्वनी सभागार में आयोजित चार दिवसीय इंडीमून्स आर्ट्स फेस्टिवल के दूसरे दिन शुक्रवार को अभिनेता राकेश बेदी की एकल प्रस्तुति ‘मसाज’ ने दर्शकों को हंसी, व्यंग्य और संवेदना से भरपूर अविस्मरणीय अनुभव दिया। रंगा थिएटर समूह द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने शुरुआत से ही दर्शकों को बांधे रखा और अंत में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कलाकार को स्टैंडिंग ओवेशन मिला। राकेश बेदी ने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का परिचय देते हुए एक ही मंच पर 24 अलग अलग किरदारों को जीवंत किया। उनकी सहज शैली और आत्मीय प्रस्तुति ने पूरे सभागार को एक भावनात्मक लय में बांध दिया।
जीवंत कोलाज में बदला नाटक
नाटक में हैप्पी सिंह के मुख्य किरदार के जरिए एक संघर्षशील युवा की कहानी प्रस्तुत की गई जो सपनों और हकीकत के बीच जूझता नजर आता है। इसके साथ ही कोहली साहब, मंत्री का पीए, चौकीदार, बस स्टॉप का अजनबी, बार गर्ल और नायिका की मां जैसे विभिन्न पात्रों को बेदी ने बारीकी से मंच पर उतारा। हर किरदार अपनी अलग पहचान के साथ उभरा, जिससे पूरी प्रस्तुति एक जीवंत कोलाज बन गई। प्रस्तुति में हास्य के विविध रंग देखने को मिले। राजनीतिक व्यंग्य, स्लैपस्टिक और सूक्ष्म हास्य के संतुलन ने दर्शकों को लगातार हंसने पर मजबूर किया मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी का समावेश नाटक को साहित्यिक ऊंचाई प्रदान करता है। नाटक का सबसे भावुक क्षण अंत में सामने आया, जब ‘हैप्पी सिंह’ अपनी पत्नी का पत्र पढ़ता है। बिना किसी प्रॉप के प्रस्तुत यह दृश्य अभिनय की गहराई और संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण बना जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।
प्रस्तुति की सशक्त तकनीकी पहलू
निर्देशन, मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था ने नाटक को मजबूत आधार दिया। हालांकि कुछ क्षणों में ध्वनि व्यवस्था में हल्की कमी महसूस हुई, लेकिन इससे प्रस्तुति के प्रभाव पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
विश्व रंगमंच दिवस पर हुई चर्चा
इस अवसर पर विश्व रंगमंच दिवस के तहत विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसका संचालन बिशना चौहान और विनय उपाध्याय ने किया।
सत्र में राकेश बेदी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय NSD के पूर्व निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी, वसंत निर्गुणे, डॉ. सविता भार्गव और राघवेंद्र राघव सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
राकेश बेदी ने कहा कि भोपाल की थिएटर ऑडियंस देश में सबसे बेहतर है और रंगमंच कलाकार को सीधे दर्शकों से जुड़ने का अवसर देता है। चित्तरंजन त्रिपाठी ने भारतीय रंगमंच की परंपराओं को भविष्य का आधार बताते हुए थिएटर को सिनेमा की मां कहा।
युवा कलाकारों ने जमाया रंग
शाम को अपना स्टेज पहल के तहत शहर के युवा कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। बैंड स्काई रिदम ने सूफी रॉक अंदाज में गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा युवा कवियों, शायरों, बीटबॉक्सर्स और बाल कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया







