कटनीमध्य प्रदेश

होली के पावन दिन घर लौटे कैमोर के वीर सपूत, 40 वर्षों तक सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी का औद्योगिक नगरी में ऐतिहासिक स्वागत, भारत माता के जयकारों की गूंज

कटनी/कैमोर, यशभारत। कैमोर नगर के लिए 4 मार्च का दिन गर्व, सम्मान और भावनाओं से भरा ऐतिहासिक क्षण बन गया, जब नगर के वीर सपूत सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी 40 वर्षों की अदम्य सेवा के बाद अपने गृह नगर लौटे। होली के पावन अवसर पर उनकी घर वापसी ने पूरे शहर को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी ने मात्र 21 वर्ष की आयु में मातृभूमि की रक्षा का संकल्प लेते हुए (बीएसएफ) में भर्ती ली थी। चार दशकों तक सीमाओं पर साहस, अनुशासन और निष्ठा के साथ सेवा देते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 28 फरवरी को वे आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्त हुए। उनकी अंतिम पदस्थापना जम्मू और कश्मीर में रही, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण हालातों के बीच उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। नगर में उनके आगमन पर ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ भव्य स्वागत किया गया। नगर परिषद कैमोर के पूर्व अध्यक्ष गणेश राव ने शाल भेंट कर एवं पुष्प वर्षा कर उनका सम्मान किया। नगर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पमालाओं से उनका अभिनंदन किया। जगह-जगह “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों से वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो गया।
नीतू किराना दुकान के संचालक ने पुष्पमाला पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को रसगुल्ले वितरित कर होली की शुभकामनाएं दी गईं। नगर के गणमान्य नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने भी जगह-जगह उनका सम्मान कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। अपने गृह नगर पहुंचने पर सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी सबसे पहले लाल नगर स्थित हनुमान जी के मंदिर में पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात अपने निवास पहुंचकर उन्होंने गौ माता की पूजा कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया। यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था, जहां एक सच्चा सैनिक अपनी मातृभूमि और संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट करता नजर आया। सूबेदार के पद पर रहते हुए वीरेंद्र द्विवेदी ने कंपनी स्तर पर नेतृत्व किया और अपने अधीनस्थ जवानों का मार्गदर्शन करते हुए अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी कार्यशैली, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें साथियों के बीच सम्मानित स्थान दिलाया। सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया।उनकी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर उनके पुत्र चंदन द्विवेदी ने गर्व व्यक्त किया। परिवार सहित पूरे नगर को उनके योगदान पर गर्व है। कैमोर नगर के लिए यह केवल एक स्वागत समारोह नहीं, बल्कि देशभक्ति और सम्मान का उत्सव बन गया। चार दशकों तक देश सेवा के बाद जब कोई सैनिक अपने नगर लौटता है, तो वह केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि समर्पण, त्याग और राष्ट्रप्रेम की जीवित मिसाल बनकर लौटता है। सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी ने अपने कर्म और कर्तव्यनिष्ठा से कैमोर का नाम देशभर में रोशन किया है।
उनकी घर वापसी ने यह संदेश दिया कि सच्ची देशसेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती और समाज अपने वीरों का सम्मान करना जानता है। कैमोर नगर का यह ऐतिहासिक दिन लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में अंकित रहेगा।

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