यशभारत डिंडोरी lडिंडौरी जिले के समनापुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चादंरानी में निर्माण कार्यों के नाम पर शासकीय राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। वहीं मामले को लेकर जिला पंचायत डिंडौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी (पंचायत) न्यायालय ने सरपंच और सचिव पर कुल 2 लाख 15 हजार रुपये की वसूली का आदेश पारित किया है। यह आदेश मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत जारी किया गया
— जारी आदेश के मुताबिक
जारी आदेश प्रकरण में उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर द्वारा रिट याचिका क्रमांक 14593/2018 में पारित निर्णय के अनुपालन में शासन द्वारा धारा 89 में संशोधन किया गया था। इसके बाद म.प्र. राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 606 दिनांक 30 नवम्बर 2022 के माध्यम से ग्राम पंचायत मामलों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को विहित प्राधिकारी नियुक्त किया गया।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत समनापुर द्वारा पत्र क्रमांक/ज.पं.शि.शा./2025/280 दिनांक 28 अक्टूबर 2025 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत भवन में गेट निर्माण कार्य एवं सीसी रोड निर्माण कार्य में शासकीय राशि का गबन किया गया है।
इस शिकायत की जांच जनपद स्तरीय जांच समिति द्वारा कराई गई। समिति ने 16 नवम्बर 2025 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें पाया गया कि ग्राम पंचायत भवन में गेट निर्माण के नाम पर मार्च 2025 में 50,500 रुपये की राशि आहरित की गई, लेकिन निरीक्षण के दौरान मौके पर कोई गेट नहीं मिला। इससे राशि के गबन की पुष्टि हुई।
इसी प्रकार सीसी रोड निर्माण कार्य दिगम्बर के घर से शिव मंदिर तक के लिए जून और जुलाई 2025 में कुल 1,64,500 रुपये की राशि निकाली गई, लेकिन जांच में मौके पर कोई कार्य नहीं पाया गया। समिति ने इसे सरपंच और सचिव की मिलीभगत से शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला माना। जांच में कुल 2,15,000 रुपये की राशि के गबन की पुष्टि होने के बाद न्यायालय ने इसे बराबर-बराबर विभाजित करते हुए सरपंच श्रीमती मायावती परस्ते एवं सचिव श्रीमती प्रतिभा वाटिया से प्रत्येक से 1,07,500 रुपये की वसूली निर्धारित की।
प्रकरण में दोनों को सुनवाई के लिए 16 जनवरी 2026 एवं 22 जनवरी 2026 को दो अवसर दिए गए। दोनों ने संयुक्त रूप से लिखित जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। न्यायालय ने माना कि पर्याप्त अवसर के बावजूद प्रमाण न दे पाना आरोपों की पुष्टि करता है और राशि वसूली योग्य है। बता दें कि आदेश में निर्देश दिए गए हैं कि सात दिवस के भीतर राशि जमा नहीं करने पर पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 एवं मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि इस मामले को यशभारत ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद प्रशासन ने जांच प्रक्रिया के बाद भ्रष्टाचार के मामले में सरपंच सचिव से वसूली के लिए निर्देश जारी किए गए।