बिजली उपभोक्ताओं को फिर लगेगा करंट, नए साल में बढक़र आएगा बिल, 10 फीसदी तक बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव

कटनी, यशभारत। उपभोक्ताओं को बिजली एक बार फिर करंट का झटका देने जा रही है। सरकार ने नए साल से बिजली का बिल बढ़ाए जाने की पूरी तैयारी कर ली है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में बिजली बिलों में 10 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश की बिजली कंपनियों ने 42 हजार करोड़ के घाटे को पूरा करने का प्लान तैयार किया है। जिसका बोझ उपभोक्ताओं की जेब पर डाला जा रहा है। विद्युत नियामक आयोग ने भी टैरिफ पिटीशन दी है। आयोग ने कंपनियों की पिटीशन को स्वीकार कर लिया है। पिटीशन को लेकर आयोग अब जल्द ही सुनवाई शुरू होने जा रही है। बिजली की बढ़ी हुई कीमतें 1 अप्रेल 2026 से लागू हो सकती हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बिजली की कीमतों में हर साल बढोत्तरी हो रही है। साल 2025-26 में 3.46 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी, जबकि कंपनियों ने 7.52 फीसदी बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया था। साल 2024-25 में बिजली दरों में सबसे कम बढोत्तरी 0.07 फीसदी हुई थी, जबकि कंपनियों ने 3.86 फीसदी का प्रस्ताव सौंपा था। बड़ी सवाल यह है कि प्रदेश में हर साल टैरिफ बढ़ाया जा रहा है। यदि बिजली कंपनियों को मैनेजमेंट बेहतर हो, तो इसका बोझ आम जनता पर डालने की नौबत ही नहीं आएगी। जानकारों की मानें तो यह पहली बार है, जब इतनी ज्यादा बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव सौंपा गया है, इसके पहले साल 2022-23 में कंपनियों ने 8.71 फीसदी का प्रस्ताव सौंपा था। उधर टैरिफ को लेकर जल्द ही सुनवाई शुरू होने जा रही है। विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। नियामक आयोग जल्द ही इसकी सूचना जारी करने जा रहा है। सुनवाई के लिए आयोग सार्वजनिक सूचना जारी कर इसकी तारीखों का ऐलान करेगा। पिटीशन बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को लेकर आम लोगों के पक्ष को भी सुना जाएगा।
घाटे की भरपाई के लिए बढ़ोत्तरी की तैयारी
मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने तीनों कंपनियों की ओर से बिजली बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग को सौंपा गया है। बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी के लिए बिजली कंपनियों को हो रहे घाटे को बताया गया है। प्रस्ताव में बताया गया है कि मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 18 हजार 712 करोड़ का घाटा हो रहा है। इसी तरह पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 7 हजार 285 करोड और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 16 हजार 378 करोड़ का घाटा हो रहा है। घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने अलग-अलग स्लैब में बिजली बिल का प्रस्ताव दिया है, इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव 300 प्लस यूनिट के स्लैब में दिया है।







