विप्र शक्ति ने राष्ट्रपति को पत्र प्रेषित किया – नारी अस्मिता का अपमान भी सरकारें अब जातीय चश्मे से देखेंगी
वर्मा को क्यों नहीं अभी तक किया निलंबित

जबलपुर। मध्य प्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा की नारी इकाई विप्रा शक्ति ने आई ए एस वर्मा के द्वारा आरक्षण के उद्देश्य को अपने बेटे को विप्र कन्या के दान तक बताने वाले बयान पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार की चुप्पी पर विप्रा शक्ति की संयोजिका श्रीमती शक्ति त्रिवेदी ने भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को पत्र प्रेषित कर मर्मस्पर्शी प्रश्न उठाया है कि क्या नारी अस्मिता को भी अब जातीय दृष्टि से सरकारें देखेंगी। सरकारें इस अपमान पर मौन रहकर वर्मा के कृत्य का अनुमोदन कर रही हैं?
अपमान विप्र महिलाओं को हुआ है और केवल इसलिए सरकारें कठोर कदम नहीं उठा रही हैं, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। विप्रा शक्ति ने लिखा कि एक ब्राह्मण परिवार की पुत्री के हृदय में यह वाक्य किस तरह का संत्रास भरेगा, इसकी कल्पना मात्र से ही सिहरन होती है। और एक आरक्षण लाभार्थी युवक के मन में यह कैसी विकृत छवि गढ़ेगा? क्या एक सिविल सेवक का कर्तव्य सामाजिक सौहार्द को इस प्रक्षिप्त तरीके से कलंकित करना है?

मध्य प्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के सह संयोजक असीम त्रिवेदी तथा प्रशांत अवस्थी ने संतोष वर्मा, के विरुद्ध संवैधानिक रूप से असंगत वनारी गरिमा के विरूद्ध और जातियों के मध्य शत्रुता को प्रोत्साहित करने वाले कथनों एवं केन्द्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 1964 तथा भारतीय न्याय संहिता , 2023 की धारा 196 और धारा 353(2)के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर तथा गंभीर अवज्ञा के सम्बन्ध में तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच करने की मांग की है। उनके अनुसार यह कथन विभिन्न जाति समूहों के मध्य घृणा, द्वेष एवं वैमनस्य उत्पन्न करने के लिए स्पष्ट रूप से जानबूझकर और सुनियोजित साजिश के तहत उस अधिकारी द्वारा कहा गया है। एकमात्र रूप से “ब्राह्मण” पुत्रियों को इंगित हुए तथा उन्हें “दान” करने योग्य वस्तु के रूप में उत्तेजक एवं सनसनीखेज ढंग से चित्रित करके वर्गों के मध्य शत्रुता, घृणा या वैमनस्य को उत्पन्न करने या प्रोत्साहित करने वाले कथन के अपराध को बनाता है।

अधिकारी ने संविधान के अनुच्छेद 310 के अंतर्गत ग्रहण की गई शपथ का उल्लंघन किया है, जिसमें संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा बरतने तथा कर्तव्यों का निष्पादन विवेकपूर्ण, निष्पक्ष रूप से करने की शपथ है। एक कर्मचारी सम्मेलन में इस मंच का उपयोग इस प्रकार के वक्तव्यों के लिए करके, उन्होंने सिविल सेवा में जन विश्वास को कमजोर किया है।







