साइबेरिया, रूस के प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए तैयर हुआ नो डिस्टर्ब जोन

साइबेरिया, रूस के प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए तैयर हुआ नो डिस्टर्ब जोन
– वन विहार में पक्षियों के संरक्षण के लिए किए इंतजाम
आशीष दीक्षित, भोपाल। सर्द हवाओं के साथ ही दुनिया के सबसे ठंडे क्षेत्रों साइबेरिया, रूस, उ’बेकिस्तान, चीन और आर्कटिका से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके प्रवासी पक्षी भोपाल के जलाशयों में पहुंचने लगे हैं। लगभग 12 हजार किलोमीटर की थकाने वाली यात्रा के बाद यह वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के इलाके में शरण ले रहे हैं। वहीं कुछ पक्षी ऐसे भी हैं जो बड़ा तालाब, कलियासोत, केरवा, हताईखेड़ा पर भी दिख रहे हैं। यूरोप से यूरेशियन वेगान, रूस मंगोलिया से ब्लैक रेडस्टार्ट और लैसर व्हाइट थ्रोट जैसी प्रजातियां भी शहर पहुंच चुकी हैं। वहीं विसलिंग टील ने नवंबर में ही डेरा जमा लिया और वूली नेट स्टार्क ने यहां स्थायी घर बना लिया है। प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए नो डिस्टर्ब जोन तैयार किया गया है।

प्रवासी पक्षियों की संख्या लगातार घट रही
इस सुंदर दृश्य के बीच चिंताजनक तथ्य यह है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रवासी पक्षियों की संख्या लगातार घट रही है। पक्षी विशेषज्ञ सुदेश वाघमारे बताते हैं कि बड़ा तालाब और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से हो रहे निर्माण, मानव गतिविधियों का दबाव, बढ़ती बोटिंग और सैर-सपाटे के कारण शांत वातावरण टूट रहा है। पहले जहां घूस जैसे पक्षी 10 से 15 हजार की संख्या में दिखते थे, अब 100 से 150 के छोटे झुंड ही नजर आते हैं। आसपास की कई छोटी-बड़ी जलाशय खत्म हो चुके हैं या अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं, जिससे पक्षियों के लिए विकल्प सीमित हो गए हैं।
वन विहार के संरक्षण प्रयास सुरक्षित आसमान की कोशिश
घटती संख्या ने वन विभाग को सतर्क किया है। प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए वन विहार राष्ट्रीय उद्यान ने कई ठोस कदम उठाए हैं। वन विहार प्रबंधन ने पक्षियों के लिए प्राकृतिक घोंसले, भोजन और छाया वाले क्षेत्रों की निगरानी को बढ़ाया है। झाड़ीदार पेड़, सुरक्षित पानी के स्रोत और जलकुंभी हटाने जैसी गतिविधियाँ लगातार जारी हैं। लक्ष्य यह है कि पक्षी बिना बाधा के भोजन और आश्रय पा सकें।
तालाबों में कचरा या कैमिकल न घुलें, इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और कचरा संग्रह प्रणाली को मजबूत किया गया है। नियमित सफाई अभियान और जल गुणवत्ता परीक्षण भी किए जा रहे हैं ताकि जलीय पक्षियों को स्व‘छ पानी मिल सके। आसपास कृषि क्षेत्रों में कीटनाशकों के दुष्प्रभाव को देखते हुए वन विभाग ने इनके उपयोग को कम करने और जैविक विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया है। इससे पक्षियों की खाद्य श्रृंखला सुरक्षित रहती है।
नो-डिस्टर्ब ज़ोन और सुरक्षित आश्रय
वन विहार के संवेदनशील क्षेत्रों को नो-डिस्टर्ब ज़ोन घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही सीमित कर दी गई है, जिससे घोंसले बनाने और आराम करने वाले पक्षियों को शांति मिल सके। शिकारियों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए गश्त भी बढ़ाई गई है। स्थानीय समुदाय, स्कूल-कॉलेजों और पर्यटकों को पक्षी संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। पोस्टर, कार्यशालाएं और गाइडेड टूर के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि छोटी सी लापरवाही भी संवेदनशील प्रजातियों पर भारी पड़ सकती है।
नियमित पक्षी आकलन
हर साल प्रवासी पक्षियों की संख्या, प्रजातियों और उनके प्रवास चक्र का आकलन किया जाता है। यह डेटा आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और संरक्षण योजनाओं को प्रभावी बनाता है। इन प्रयासों के बाद भी चुनौतियाँ कम नहीं हैं। शहर का बढ़ता विस्तार, जलाशयों का सिकुडऩा और भीड़भाड़ प्रवासी पक्षियों के शांत जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। इसके बावजूद वन विहार प्रबंधन के संरक्षण प्रयासों ने भोपाल के आकाश में उड़ते इन सुंदर मेहमानों के लिए उम्मीद की किरण जगा रखी है।
संरक्षण के प्रयास किए जा रहे
प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, पक्षियों के आश्रय और भोजन के लिए उचित स्थान मिल सके इसके लिए भी निगरानी की जा रही है।
– विजय कुमार , फील्ड डायरेक्टर, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान







