पर्युषण पर्व : भौतिकवादी युग में अधिक भोग सामग्री का संचय करना दुख का कारण : मुनि श्री पदम सागर जी महाराज

कटनी, यश भारत। दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति के द्वारा आयोजित दशलक्षण पर्व कें नौवे दिन जैन बोर्डिंग हाउस में प.पू.मुनिश्री पदम सागर जी महाराज ने उत्तम अकिंचन धर्म पर चर्चा करते हुये बतलाया कि परिग्रह के प्रति आकर्षण या द्वेष उनकी चिंता करना यह दुख का कारण है। उससे मुक्त होने के लिए अकिंचन धर्म का पालन करना चाहिए। 24 प्रकार के परिग्रह होते है। मुनिश्री ने आगे कहा कि सभी प्रकार के विकारी भाव के परिग्रह की श्रेणी में आते है और परिग्रह का सम्पूर्ण त्याग मुनिराज ही करते हैं और गृहस्थ जीवन में जितनी भी तृष्णा घट सकती है, उसें घटना चाहिये। उन्होने उदाहरण देते हुये कहा कि जैसे छोटी से फांस जैसे शरीर में चुभ जाती है तो वह भी दुखदायी होती है। इस भौतिकवादी युग में अधिक भोग सामग्री का संचय करना दुख का कारण बनता है। अतः परिग्रह को हटाकर अपरिग्रहिय बने तभी आपका जीवन सुखमय शांतिमय होगा। शांतिधारा करने का एवं अर्द्य चढ़ाने का सौभाग्य मनीष जैन-बड्डे एवं रूंगटा कॉलोनी जैन मंदिर के श्रावक श्राविकाआें प्राप्त हुआ कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी डॉ. संदीप जैन द्वारा किया गया। पंचायत महासभा के अध्यक्ष संजय जैन, मंत्री विन्नी जैन एवं चर्तुमास महोत्सव समिति के संयोजक द्वय सि.पंचम जैन, अरविद्र जैन कोयला ने बतलाया कि उपवास करने वाले श्राद्धलुजनो का पाणना जुलूस प्रातः 8.00 बजे महावीर कीर्ति स्तंभ से प्रारंभ होकर, जवाहर चौक, कपड़ा बाजार, सुभाष चौक, मेन रोड़ स्थित जैन मंदिर के दर्शन के उपरांत समापन जैन बोडिंग हाउस में परिसर में होगा।







