जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल में जलभराव से शर्मनाक हालात: मरीजों को रेनकोट ओढ़ाकर ले जाना पड़ा वार्ड तक!

जबलपुर, शुक्रवार को हुई तेज बारिश ने जबलपुर शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है, और इसकी सबसे शर्मनाक तस्वीर सामने आई जिला अस्पताल विक्टोरिया से. अस्पताल परिसर में पानी भर जाने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भीषण परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें मरीजों को रेनकोट ओढ़ाकर और सहारा देकर पानी से भरे वार्डों तक ले जाया जा रहा है, जिसने अस्पताल प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
.jpeg)
बारिश के बाद अस्पताल बना तालाब
सुबह से जारी मूसलाधार बारिश के चलते विक्टोरिया अस्पताल का पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो गया. अस्पताल के निचले तल के वार्डों, गलियारों और ओपीडी क्षेत्रों में घुटनों तक पानी भर गया. यह स्थिति मरीजों और अस्पताल स्टाफ दोनों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई. मरीजों को बिस्तर से नीचे उतरना मुश्किल हो गया, और उनके सामान व दवाएं भी पानी में डूबने के कगार पर पहुंच गईं.

शर्मनाक तस्वीरें आई सामने
जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे बेहद विचलित करने वाली हैं. एक दृश्य में, एक मरीज को पानी से भरे गलियारे से वार्ड तक ले जाने के लिए रेनकोट ओढ़ाकर सहारा दिया जा रहा है. यह दर्शाता है कि मरीजों को कितनी विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है. परिजनों को भी अपने बीमार सदस्यों को बचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. स्टाफ भी पानी निकालने और मरीजों को अस्थायी रूप से शिफ्ट करने में जुटा रहा.

स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर
इस जलभराव से न केवल मरीजों की परेशानी बढ़ी है, बल्कि अस्पताल की सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. ओपीडी में मरीजों को पंजीकरण कराने और डॉक्टरों तक पहुंचने में खासी दिक्कतें आईं. हालांकि, आपातकालीन सेवाएं किसी तरह जारी रहीं, लेकिन उन पर भी दबाव साफ दिख रहा था.

दावों की खुली पोल, व्यवस्था पर सवाल
नगर निगम और अस्पताल प्रशासन ने मानसून से पहले बेहतर जल निकासी व्यवस्था के दावे किए थे, लेकिन विक्टोरिया अस्पताल की यह स्थिति उन सभी दावों की पोल खोलती है. नागरिकों में इस लापरवाही को लेकर भारी रोष है. उनका कहना है कि अगर जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जगह पर ऐसी बदहाली है, तो शहर के अन्य हिस्सों का क्या हाल होगा.
यह घटना जबलपुर की बुनियादी सुविधाओं की हकीकत बयां करती है और तत्काल सुधार की मांग करती है ताकि भविष्य में मरीजों को ऐसी नारकीय परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.







