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कल लाइनमैन दिवस:जान जोखिम में डालकर काम करने वाले जांबाज हैं लाइनमैन

उनकी समस्याओं पर ध्यान देने की भी है जरूरत 

 

 

जबलपुर यश भारत। कल 4 मार्च को विद्युत कंपनियों के द्वारा लाइनमैन दिवस मनाया जाएगा इसके तहत बाकायदा तरंग प्रेक्षा ग्रह में कार्यक्रम आयोजित होगा जिसमें लाईनमैनो का न केवल सम्मान किया जाएगा बल्कि उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर उनके कार्यों की तारीफ के पुल भी बांधे जाएंगे। खाना पीना भी होगा नाच गाने के कार्यक्रम भी होंगे और कंपनियों के जिम्मेदारों के द्वारा लाईनमैनों की हित की बड़ी-बड़ी बातें भी की जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे ठीक विपरीत है। सम्मान और तारीफ अपनी जगह पर है लेकिन जरूरत है लाईनमैनों के सामने जो समस्याएं हैं उन्हें दूर करने की। विद्युत वितरण की व्यवस्था में लाइनमैन एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो सर्दी गर्मी बारिश जैसे मौसम में भी 24 घंटे एक्टिव रहकर अपने कार्य को अंजाम देने में लगे रहते हैं तब कहीं जाकर लोगों को व्यवस्थित विद्युत आपूर्ति संभव हो पाती है। कई बार तो संसाधनों के अभाव में विद्युत सुधार के लिए लाइनमैन की जान भी जोखिम में आ जाती है और कई हादसे भी घटित होते रहते हैं। लाइनमैन को यदि जांबाज कर्मचारी की श्रेणी में शामिल किया जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी विद्युत कंपनियों में लाइनमैन ही वह शख्स है जो अपनी जान को जोखिम में डालकर भी अपने कार्य को अंजाम देता है। दिन हो या रात ठंड गर्मी हो या बरसात इनका काम कभी रुकता नहीं है। कई बार तो लाइनमैन को ना केवल अपने अधिकारियों के गुस्से का शिकार होना पड़ता है तो कई बार विद्युत व्यवस्था में सुधार के दौरान उपभोक्ताओं के साथ भी उसकी तू तू मै मै से लेकर धक्का मुक्की गाली गलौज और मारपीट तक का शिकार होना पड़ता है समय-समय पर इस तरह के समाचार भी सामने आते रहते हैं लेकिन इन सब बातों को भुलाकर भी लाइनमैन अपने कार्यों के प्रति मुश्तैद रहता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि लाइनमैन की समस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए तब कहीं जाकर लाइनमैन दिवस की सार्थकता होगी अन्यथा एक दिन के औपचारिक कार्यक्रमों से लाइनमैन की जिंदगी में कोई बड़े बदलाव आने वाले नहीं हैं। लाईनमैनों की समस्या की बात की जाए तो एक बड़ी समस्या है संसाधनों की कमी जो लाईनमैनों को असुरक्षित बनाती है।
लाइन कर्मियों से दूसरे काम भी कराए जाते हैं। जोखिम भरे कामों में उन्हें झोंक दिया जाता है अधिकारी थोड़ी सी गलती होने पर उन्हें सोकाज नोटिस जारी कर देते हैं यहां तक कि उनकी वेतन वृद्धि तक रोकने की धमकी तक दे डालते हैं। अवकाश के दिन में भी उन्हें कोई छुट्टी नहीं मिलती बल्कि अधिकारी अवकाश के दिन में भी इन्हें बुलाकर उनसे काम करवाता है। मामूली गलती पर भी सारा ठीकरा लाइनमैन के सिर फोड़ दिया जाता है। अधिकारी कार्यवाही का डर दिखाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने में भी पीछे नहीं रहते। पूर्व
पूर्व मैं देखने में आया है कि अनेक लाइनमैन कार्य के दौरान हादसों का शिकार हो जाते हैं लेकिन बदले में उन्हें कुछ खास नहीं मिलता। विभाग से हटकर सहयोगी कर्मचारियों को मदद के लिए आगे आना पड़ता है। लाइन में काम करने वाले इन कर्मचारियों में से तो बहुतो का बीमा तक नहीं रहता कि यदि कोई कर्मचारी हादसे का शिकार हो जाए तो उसके परिजनों को आर्थिक मदद मिल सके। इन्हीं समस्याओं से जूझते हुए लाइनमैन का सम्मान करना और उनके कार्यों की सराहना करना अच्छी पहल तो है लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि उनकी समस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाए तभी लाइनमैन दिवस की सार्थकता होगी अन्यथा ऐसे आयोजन तो होते हैं और लोग भूल भी जाते हैं।

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