400 करोड़ का प्लान कागजों में दफनःपीपीपी प्रोजेक्ट के तहत शुरू होने थे काम
काॅमर्शियल काॅम्पलेक्स , होटल , हाॅस्पिटल , कम्युनिटी हाॅल बनाने की योजना तैयार की गई थी

जबलपुर, यशभारत। नगर निगम ने पुराने बस स्टैण्ड , क्षेत्रीय बस स्टैण्ड , पिसनहारी की मढ़िया के नीचे स्थित बस स्टैण्ड और नगर निगम के पीछे वर्क शाॅप व कर्मचारी अधिकारी आवास की जमीन पर काॅमर्शियल काॅम्पलेक्स , होटल , हाॅस्पिटल , कम्युनिटी हाॅल बनाने के लिए करीब 400 करोड़ रुपये का प्लाॅन तैयार किया गया था । लेकिन उक्त सभी प्रोजेक्ट कागजों में मौखिक रूप से बनाए गए और कागजों में ही दफन हो गए । जबकि इन प्रोजेक्टों से न केवल नगर निगम को करोड़ों की आमदनी होने की संभावना व्यक्त की जा रही थी । बल्कि शहर की जर्जर और खपड़ैल मकानों को हटाने की भी प्लाॅनिंग थी ।
लेकिन इन प्रोजेक्टों पर उस समय पानी फिर गया , जब प्रशासकीय स्वीकृति और एमआईसी की स्वीकृति नहीं मिली । ये सभी प्रोजेक्ट पीपीपी ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ) में तैयार कराए जाने थे । लेकिन वे सब कागजों में ही सिमटकर रह गए और पुराने बस स्टैण्ड के जिस जर्जर इमारत को हटाने का प्लाॅन तैयार किया गया था । उस जर्जर बिल्डिंग के दुकानदार , होटल वाले बेफिक्र हो गए । जबकि इसके लिए नगर निगम ने पुराने बस स्टैण्ड के रैन बसेरा और यहां पर बने मार्केट के दुकानदारों को हटाने का नोटिस भी जारी किया गया था । लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन प्रोजेक्टो को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । इस प्रकार से जहां पर काॅम्पलेक्स , होटल , हाॅस्पिटल बनाया जाना था , उन स्थानों पर अघोषित वाहन स्टैण्ड संचालित हो रहा है ।
इन प्रोजेक्टों को लांच किया जाना था
काॅमर्शियल काॅम्पलेक्स प्रोजेक्ट के हाल
पीपीपी ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ) के तहत नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने प्लाॅन तैयार किया था । लेकिन नगर निगम व प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने के कारण इस प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं हो सका और यह प्रोजेक्ट कागजी लेआउट तक ही सीमित रहा । इस पर कोई काम आज तक नहीं हुआ ।
प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली इसलिए अटका
पीपीपी ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ) के तहत नगर निगम के अधिकारयों ने स्मार्ट सिटी के माध्यम से इस प्रोजेक्ट पर भी काम करने के लिए कहा था । यहां पर कामर्शियल काॅम्पलेक्स और हाॅस्पिटल बनवाने का प्लाॅन था । इस प्रोजेक्ट पर भी एमआईसी व प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली , जिसके कारण यह प्रोजेक्ट भी कागजों में ही सिमटकर रह गया ।
जमीन नहीं होने के कारण अधर में लटका प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को भी स्मार्ट सिटी ने अपने प्लाॅन में शामिल किया था । कोशिश थी की इस प्रोजेक्ट को पीपीपी ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ) के तहत लांच किया जाए । लेकिन बाद में पता चला की इस बस स्टेण्ड की जमीन ही नगर निगम के नाम नहीं है , जिस कारण यह प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में चल गया और आज तक इस प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं हुआ ।
काॅम्पलेेक्स का काम भी अधर में
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत नगर निगम और स्मार्ट सिटी को न्यू नगर निगम की बिल्डिंग , जिसमें सदन और विभागीय कार्यालय का निर्माण किया जाना था । इसके अलावा कर्मचारी अधिकारी आवास के साथ कामर्शियल काम्पलेक्स का भी निर्माण करने की प्लाॅनिंग की गई थी । इसे भी पीपीपी ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ) के तहत लांच करना था , लेकिन संभव नहीं हो सका ।








