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छह माह मेंं 313 अपहरण दर्ज, किशोर उम्र मे घर छोड़ रहे नाबालिग, इश्क-मोहब्बत के साथ, परिजनों का दबाव, डांट नहीं झेल पा रहे युवा

जबलपुर। छह माह में अगर अपहरण के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाएं तो 2025 में जनवरी से जून माह में 313 अपहरण के मामले दर्ज किए गए जिसमें गायब होने वाले अधिकांश नाबालिग हैं, अधिकतर अपनी मर्जी से घर छोडक़र गए हैं, नाबालिग के गायब होने के मामलों में 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हर नाबालिग की गुमशुदगी के मामले में पुलिस अपहरण का केस दर्ज करें। जिसके चलते नाबालिग के गायब होने पर पुलिस अपहरण का मामला तो दर्ज कर लेती है, लेकिन दस्तयाबी के बाद मामला किशोर उम्र में इश्क या परिजनों का दबाव, डांट फटकार से जुड़ता हैं। नाबालिक उम्र मेंं प्रेम जाल में फंसकर भी नाबालिक घर छोडक़र चले जाते हैं, कई मामले तो अब तक पुलिस रिमांड में लंबित हैं, किसी का बेटा, तो किसी की बेटी गायब हैं तो किसी का सुहाग, तो प्रताडऩा समेत अन्य कारणों से किसी के माता पिता भी लापता हैं। अधिकांश मामलों में पुलिस के हाथ खाली हें। जिसके चलते पीडि़त परिवारों के जहां अंगना सूने है तो उन्हें अपनों के लौटना का इंतजार भी हैं। अधिकांश 15 से 17 साल के नाबालिग के अपहरण मामले मेें पुलिस की जांच प्रेम प्रसंग में आकर ही खत्म हो रही है जिसमेेंं कोई लौट रहा है तो शहर ही छोडक़र भाग चुका है।
तलाश के नाम पर खानापूर्ति
गायब लोगों की तलाशके नाम पर भी पुलिस खानापूर्ति करती है अपहरण या गुम इंसान दर्ज करने के बाद मामले को हल्के मेंं लिया जाता हैं। तलाश कहां और कैसे चल रही है इसका जवाब किसी के पास नहीं होता हैं। गुमशदुगी मामले में तो लापरवाही बरती जाती है जबकि नाबालिग बालक बालिकाओं के गुम होने या हाईप्रोफाइल मामलों में जरूर सक्रियता से पतासाजी होती है लेकिन अधिकांश मामले इश्क या परिवारों के दबाव में बच्चों के घर छोडऩे की बातें सामने आती हैं।
सोशल मीडिया: दस्तयाबी के बाद भी लापता
कई तो ऐसे भी मामले सामने आते है जिसमें दस्तायाबी के बाद भी संबंधित के लापता होने की जानकारी वायरल होती रहते है। दरअसल जब पुलिस गुमशदगी या अपहरण दर्ज करती है तो उसकी तस्वीरों और जानकारी को सोशल मीडिया पर विभिन्न प्लेटफार्म पर वायरल करती हैं, ताकि यह जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके इसमें परिजनों के साथ ही पुलिस थाने और जिले के कंट्रोल रूम तक का नम्बर दिया जाता है कइ मामले ऐसे होते है जिसमें दस्तयाबी तो हो जाती है लेकिन सोशल मीडिया में लापता की जानकारी शेयर होती रहती हैं।
पेंडेंसी के साथ अपराध बढ़ रहे
नाबालिग लडक़ा-लडक़ी के एकाएक लापता होने के मामलों में जहां लगातार पेंडेंसी बढ़ रही हैं तो वहीं अपराध भी बढ़ रहे है। अनेक ऐसे मामले में जिसमें पीडि़त परिवार पुलिस के सामने अपने चहेतों को खोजने के लिए गिड़गिड़ाते रहते हैं लेकिन पुलिस की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या संतुष्टिपूर्वक दिलासा नहीं दी जाती है।

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