विजयराघवगढ़ में अतिक्रमण हटने के बाद बद से बदतर हो गए हालात, न नाली बनी, न सडक़, व्यापार भी चौपट, प्रशासन निद्रा में

विजयराघवगढ़, यशभारत। नगर परिषद क्षेत्र के हालात इन दिनों बेहद खराब हैं। एक और कोर्ट के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन द्वारा आजाद चौक से संकट मोचन चौराहा तक मेन रोड में अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाई गई थी, जिससे वर्तमान में समूचे नगर की स्थित बद से बत्तर हो चुकी है। लोगों का कहना है कि नगर की उपेक्षा का जिम्मेदार आखिर कौन है। व्यापार चौपट हो चुका है। मेन रोड के व्यापारियों की माने तो स्थानीय प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहिम आरंभ करने के उपरांत नल जल योजना के तहत पाइप लाइन एवं सडक़ के किनारे नाली निर्माण कराए जाने की घोषणा की गई थी। जिससे मेन रोड को सुरक्षित रखने अंधा मोड़ से होते हुए वार्ड क्रमांक 15 की सीमा से लगे कारीतलाई रोड तक पहुंचने के लिए वार्ड क्रमांक 3 एवं 5 की सडक़ से समस्त वाहनों की आवाजाही आरंभ करा दी गई थी, जहां बरसात के कारण कीचड़ से सनी सडक़ में लोगों का पैदल चलना दूभर हो रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियो को इन समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। अब यह प्रश्न है कि इसका जिम्मेदार कौन है। विगत 4 महीनों से जन समस्या बनी हुई है किंतु ना तो जिला प्रशासन न ही स्थानीय प्रशासन के कानों में जूं नहीं रेंगी। संकट मोचन चौक में बनी नाली की स्थिति भयावह हो चुकी है। वार्ड क्रमांक 4 में निवासरत हरिजन आदिवासियों सहित वार्ड क्रमांक 3, 5 एवं 15 के वार्डवासियों का पैदल आवागमन बंद हो रहा है। जिला प्रशासन से स्थानीय नागरिकों ने अपेक्षा की है की अविलंब नागरिकों की समस्या का समाधान कराया जाए अन्यथा समस्त लोग एकत्र होकर आंदोलन हेतु बाध्य हो जाएंगे, जिसकी जवाबदारी प्रशासन की होगी।







