वाह रे ! प्रशासन : कागजों में पक्का मकान, मौके पर झोपड़ी! जांच में खुली पोल…रिकॉर्ड में दो पक्के कमरे, मौके पर मिला कच्चा मकान

सतना/रामपुर बघेलान यश भारत । प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने के दावों के बीच रामपुर बघेलान जनपद पंचायत के ग्राम बीदा (सेमरा) से गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में गरीब हितग्राही का मकान दो कमरों का पक्का दर्शाकर उसे योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया, जबकि मौके पर उसका मकान पूरी तरह कच्चा और जर्जर मिला।
मामले के अनुसार, ग्राम बीदा निवासी शिवप्रसाद पटेल ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने पर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत क्रमांक 38925785 में आरोप लगाया गया कि पात्र होने के बावजूद उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। शिकायत के निराकरण में संबंधित अधिकारियों ने रिपोर्ट लगाकर दावा किया कि हितग्राही के पास पहले से दो कमरों का पक्का मकान है, जिसके आधार पर शिकायत बंद कर दी गई।
हालांकि बाद में हुई जांच में यह दावा गलत साबित हुआ। मौके पर पहुंचे अधिकारियों को दो कमरों का कोई पक्का मकान नहीं मिला। जांच में सामने आया कि हितग्राही आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। इसके बाद सीएम हेल्पलाइन में लगाई गई रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह मामला अकेला नहीं है। गांव के करीब 20 से अधिक गरीब परिवारों को भी इसी तरह रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज कर प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित किया गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर 20 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत और जनपद स्तर पर वर्षों से पदस्थ कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यप्रणाली के कारण पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि करीब 15 वर्षों से जमे अधिकारियों के कार्यकाल में इस तरह की अनियमितताएं लगातार सामने आती रही हैं।
मामले की जानकारी मिलने पर जनपद पंचायत रामपुर बघेलान की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रश्मि पाण्डेय ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा फर्जी रिपोर्ट सामने आती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और पात्र हितग्राहियों को उनका अधिकार दिलाया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में दो पक्के कमरे दर्ज हैं, तो मौके पर वे कमरे आखिर कहां हैं? यदि रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज कर गरीबों को योजनाओं से वंचित किया गया है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।







