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बड़ी खबर : कटनी के डॉक्टर को वीडियो कॉल के जरिए घर पर किया डिजिटल अरेस्ट, दिल्ली बम विस्फोट में उनके नाम की सिम के उपयोग की जानकारी देकर डराया, दहशत में डेढ़ घंटे गुजारे चिकित्सक दंपत्ति ने, लाखों की रकम से लुटते बचे, सायबर सेल में हुई शिकायत

कटनी, यशभारत। कटनी में डिजिटल अरेस्ट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आजाद चौक गाटरघाट क्षेत्र में रहने वाले गहोई समाज के सरपंच डॉ हजारी लाल गुप्ता आज दोपहर इसके शिकार हुए। उनके मोबाइल पर एनआईए क्राइम ब्रांच दिल्ली के अधिकारी बनकर कॉल किया गया और दिल्ली के लाल किले में कुछ दिन पहले हुए बम विस्फोट में उनके नाम की सिम के दुरुपयोग की जानकारी देकर उन्हें डराया गया। करीब डेढ़ घंटे अपने घर के कमरे में डिजिटल अरेस्ट रहने के बाद परिजनों की मदद से डॉक्टर दंपत्ति इससे बाहर आ सके। साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल पर उनसे उनके तमाम बैंक खातों और उसमें जमा रकम के बारे में जानकारी लेते हुए आधार कार्ड का डिटेल ले लिया। अपराधी उनके साथ लाखों रुपए की बड़ी रकम की धोखाधड़ी करने की तैयारी में थे, लेकिन एन वक्त पर मिली जानकारी के बाद डॉ हजारी गुप्ता के परिचितों ने वीडियो कॉल बंद कराया और उन्हें लुटने से बचा लिया। इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत आज दोपहर सायबर सेल में कर दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद से पूरा परिवार दहशत में है। एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने यशभारत को बताया कि सायबर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन ठगी की कोशिश की गई है, लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। जिन नंबरों से फोन किया गया है सायबर सेल उसकी जांच कर रही है।

इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद से लोगों को ज्यादा एलर्ट रहने की जरूरत है। चूंकि दिल्ली बम विस्फोट में आतंकियों के तौर पर अनेक डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं, लिहाजा सायबर अपराधी किसी भी डॉक्टर को टारगेट करते हुए उन्हें कॉल करते हैं और उनकी संलिप्तता बताकर पहले डराते है, इसके बाद शुरू होता है डिजिटल अरेस्ट के बीच लूट का खेल। डॉ हजारी लाल गुप्ता ने अपने साथ आज हुए वाकये की जानकारी देते हुए यशभारत को बताया कि उनके मोबाइल पर एनआईए दिल्ली से कॉल आया। मोबाइल नंबर 6913516533 से कॉल करने वाले ने खुदको इंस्पेक्टर कुशल सिंह बताते हुए कहा कि वे ट्रस्ट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी दिल्ली से बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लाल किले के पास कुछ दिन पहले जो बम विस्फोट हुआ है उसके आरोपी डॉ अमर अल्वी के ठिकाने पर जांच के दौरान जो 140 लोगों की लिस्ट मिली है उसमें उनका ( डॉ हजारी गुप्ता ) का भी नाम है। बताया गया कि उनकी बम विस्फोट में संलिप्तता सामने आ रही है और वे बड़ी मुसीबत में फंसने जा रहे हैं। बम विस्फोट में आतंकियों के बीच बातचीत में आपके नाम की सिम का दुरुपयोग हुआ है। यह सिम वेस्ट मुंबई के बांद्रा इलाके की शॉप नम्बर 6 से खरीदी गई है।

रूम बंद करने को कहा, किया डिजिटल अरेस्ट

जांच एजेंसी के अधिकारी बनकर बात करने वाले सायबर क्रिमिनल्स ने उन्हें इतनी बात से डरा दिया। घर का पूरा पता पूछा और कहा कि आप अंदर से दरवाजे बंद कर लीजिए। डॉ हजारी गुप्ता ने बताया कि इस दौरान उनकी किचन में काम कर रही थी। कॉल करने वाले ने उन्हें भी अपने साथ बिठाने को कहते हुए पूछा कि उनके घर पर कौन कौन है। घबराहट और डर में डॉ हजारी गुप्ता अब पूरी तरह डिजिटल अरेस्ट हो चुके थे। उन्हें बैंगलोर में निवास कर रहे उनके बेटे और बहु से भी बात करने को मना कर दिया गया। धमकी दी गई कि अभी उन्होंने किसी को फोन लगाया या बात की या फिर कमरे से बाहर निकले तो वे बम विस्फोट के मामले में फंस जायेंगे और उन्हें दो साल जेल में काटना होंगे। बताया जाता है कि प्लेन कॉल करने वाले ने उन्हें उनका केस नम्बर 017/2025 होने की जानकारी भी दी। साथ ही यह भी बताया कि जम्मू कश्मीर टेररिजम में यह केस फाइल हुआ है। यह सुनकर डॉ दंपत्ति पूरी तरह घबरा चुके थे। बताया जाता है कि फोन करने वाले ने कहा कि थोड़ी देर बाद वीडियो कॉल पर उनसे बड़े अधिकारी बात करेंगे और वहीं आपको बचा सकते हैं।

कहा – एनआईसी सुरक्षा प्रमाण पत्र बचा सकता आपको, ऐसे लिया बैंक डिटेल

डॉ हजारी लाल गुप्ता ने बताया कि उन्हें कुछ ही मिनटों में मोबाईल क्रमांक 9332893852 से वीडियो कॉल आया। इसमें जो व्यक्ति अधिकारी बनकर बात कर रहा था, उसने कहा कि वे इस आफत से बचना चाहते हैं तो उन्हें एनआईसी का सुरक्षा प्रमाण पत्र लगेगा। यह प्रमाण पत्र उन्हें उनके पते पर दो दिन बाद भेज दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए उन्हें अपने बैंक खातों का पूरा डिटेल बताना होगा। बताया जाता है कि घबराहट और डर के चलते डॉ गुप्ता ने वीडियो कॉल पर ही अपने एक बैंक खाते में 10 लाख होने की जानकारी दे दी। इसके बाद उनसे अन्य बैंक खातों का डिटेल पूछा गया तो वे बता नहीं सकें। उनसे आधार कार्ड का डिटेल भी पूछ लिया गया। साइबर ठगों ने उन्हें बताया कि वे 123 कैमरों की निगरानी में हैं और विस्फोट को लेकर पूछताछ की उनकी पूरी रिकार्डिंग हो रही है, इसलिए सही सही सबकुछ बताते जाएं।

ओटीपी देते तो लाखों से लगता चूना, बेटे की सतर्कता में बचा लिया

बताया जाता है कि डिजिटल अरेस्ट में पूरी तरह फसाने के बाद सायबर अपराधी डॉ गुप्ता के खाते से लाखों रुपए की धोखाधड़ी के लिए उनके मोबाइल पर आया ओटीपी पूछ रहे थे, तभी उनके बेटे का फोन आ गया। डॉ गुप्ता की पत्नी ने अपने मोबाइल से जब बात करने की कोशिश की तो उन्हें मना किया गया, और कमरा न खोलने के लिए धमकाया गया। मां से बात करने में उन्हें घबराया हुआ पाकर बेटे ने तत्काल पास में रहने वाले अभय त्रिसोलिया और अन्य दोस्तों को फोन कर अपने घर पहुंचने के लिए कहा। बताया जाता है कि 3-4 लोगों ने बिना देरी किए आजाद चौक स्थित उनके घर पहुंचकर दरवाजे खुलवाने की कोशिश की। काफी देर दरवाजा पीटने के बाद डॉ गुप्ता ने दरवाजा खोला। तत्काल अभय त्रिसोलिया ने उनके हाथ से मोबाइल लेकर फोन कट किया और स्विच ऑफ किया। जाहिर है अगर लोग वक्त पर नहीं पहुंचते तो डॉ गुप्ता दंपत्ति सायबर लूट का शिकार होकर लाखों रूपये गंवा चुके होते। डॉ गुप्ता द्वारा इस पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत आज दोपहर सायबर सेल को कर दी गई है। उन्होंने बैंकों में अपने खाते भी लॉक करा दिए हैं। इस घटनाक्रम ने शहर के अन्य चिकित्सकों को भी चिंतित कर दिया है।

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