सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से चल रहा ‘नियमों के उल्लंघन’ का खेल आखिरकार खत्म हो गया है। सागर की जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. ममता तिमोरी को राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक (बर्खास्त) कर दिया है। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल द्वारा जारी इस कड़े आदेश ने न केवल सागर बल्कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। डॉ. तिमोरी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सेवा अवधि और आयु से जुड़े तथ्यों को जानबूझकर छुपाया और शासन को गुमराह कर अवैध रूप से पद का सुख भोगा।
कुर्सी का मोह और नियमों से खिलवाड़ को लेकर शिकायत की जाँच की परतें उधड़ते ही यह सनसनीखेज सच सामने आया कि डॉ. ममता तिमोरी नियमानुसार 30 अप्रैल 2024 को ही 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्ति की पात्रता रखती थीं। नियमों के मुताबिक, सेवा विस्तार के लिए 20 वर्ष की अनिवार्य क्लीनिकल सेवा आवश्यक है, जबकि डॉ. तिमोरी के खाते में मात्र 17 वर्ष 5 माह की ही सेवा दर्ज थी। इसके बावजूद, उन्होंने तथ्यों को फाइलों के नीचे दबाए रखा और करीब दो साल तक अतिरिक्त समय तक न केवल पद पर जमी रहीं, बल्कि शासन के खजाने से वेतन और भत्तों के रूप में अनुचित लाभ भी लिया।
शिकायत की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से धराशायी हुआ किला
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब एक जागरूक नागरिक ने साक्ष्यों के साथ सत्ता के गलियारों में दस्तक दी। जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए शिकायती पत्रों ने विभाग को इस धोखाधड़ी की जाँच करने पर मजबूर कर दिया। शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर ‘सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1965-66’ के उल्लंघन का हवाला देते हुए इसे शासन के साथ सोची-समझी धोखाधड़ी करार दिया। साक्ष्यों की मजबूती का आलम यह था कि विभाग को अंततः बर्खास्तगी का कड़ा फैसला लेना पड़ा।
37 करोड़ का ‘घोटाला’ और कानूनी शिकंजा
डॉ. तिमोरी की मुश्किलें केवल पद गंवाने तक सीमित नहीं हैं। उन पर 37 करोड़ रुपये के भारी-भरकम वित्तीय घोटाले की काली छाया भी मंडरा रही है। वित्त विभाग के माध्यम से इस कथित घोटाले की जाँच अब अंतिम चरणों में है और मामला माननीय उच्च न्यायालय की चौखट तक पहुँच चुका है। विभागीय जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में यह जाँच डॉ. तिमोरी के लिए जेल की राह भी खोल सकती है, क्योंकि जाँच एजेंसियां अब एक-एक पाई का हिसाब खंगाल रही हैं।
अब होगी रिकवरी और आपराधिक प्रकरण की तैयारी शासन के इस एक्शन के बाद अब डॉ. तिमोरी के विरुद्ध चौतरफा घेराबंदी शुरू हो गई है। सूत्र बताते हैं कि अवैध रूप से हासिल किए गए वेतन और भत्तों की सरकारी रिकवरी के लिए फाइलें तैयार हो रही हैं। वहीं, शिकायतकर्ता अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराने की तैयारी में हैं। सागर के इतिहास में किसी स्वास्थ्य अधिकारी की इस तरह की विदाई चर्चा का विषय बनी हुई है।
मुख्य बिंदु जिन्होंने हिला दी डॉ. तिमोरी की कुर्सी:
आयु सीमा का उल्लंघन: अप्रैल 2024 में रिटायरमेंट के बाद भी पद पर बने रहना।
अधूरी सेवा अवधि: 20 साल के नियम के विरुद्ध मात्र साढ़े 17 साल की क्लीनिकल सेवा।
तथ्यों को छुपाना: शासन को गुमराह कर आर्थिक लाभ लेना सीधे तौर पर धोखाधड़ी।
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