कटनी

नाबालिग 163 बच्चों की मानव तस्करी मामले ने पकड़ा तूल, बिहार के जन जागरण शक्ति संगठन ने पत्रकारवार्ता में लगाए गंभीर आरोप, मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, बच्चों व शिक्षकों को मुआवजा दिए जाने की मांग

कटनी, यशभारत। बिहार के अररिया से महाराष्ट्र के लातूर सहित अन्य क्षेत्रों में स्थित मदरसा में शिक्षा प्राप्त करने जा रहे 163 बच्चों को कटनी में रोककर बालगृह में रखे जाने और मदरसा के शिक्षकों पर मानव तस्करी का अपराध दर्ज किए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर बिहार के जन जागरण शक्ति संगठन ने अररिया जिले में एक पत्रकारवार्ता करते हुए मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच की मांग की है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को जवाबदेह बनाए जाने, बच्चों और शिक्षकों को मुआवजा दिए जाने एवं एसओपी जारी करने की मांग की है, ताकि ऐसी घटना को दोहराया ना जा सके। इसके अलावा सभी प्रकार के शैक्षिक संस्थानों पर समान और निष्पक्ष मानक लागू करने की भी मांग की गई है। प्रेसवार्ता में अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे उनकी मर्जी से महाराष्ट्र और कर्नाटक के तीन मदरसे में पढऩे के लिए जा रहे थे। उन मदरसों में पढऩे का सिलसिला कई वर्षों से चल रहा है। यह कोई पहले बार नहीं था, उनके साथ उनके शिक्षक थे, उनके पास रेल यात्रा का वैध टिकट था। जरूरी कागजात और माता पिता के सहमति पत्र थे, फिर भी बाल कल्याण समिति के सदस्य दुर्गेश मरैय्या की सूचना पर विगत 11 अप्रैल को गाड़ी संख्या 17609 पटना पुणे एक्सप्रेस के अलग-अलग कोचों में सवार 163 नाबालिग बच्चों का कटनी जंक्शन में रेस्क्यू किया गया। पीडि़त परिजनों का कहना था कि जब उनको यह खबर मिली तो उन्हें सदमा लगा। जिसके बाद कुछ अभिभावक कटनी पहुंचे फिर भी बच्चों को उनके हवाले नहीं किया गया। कई दिनों की कोशिशों और कटनी के स्थानीय संगठनों की मदद से सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट की प्रक्रिया को पूरा कर अंतत: 25 अप्रैल को बच्चे उन्हें सुपुर्द किये गए।
सदमे से बीमार हो गया बच्चा : अभिभावक
नरपतगंज प्रखंड के कुंडीलपुर गांव की बीबी अंजुमन ने कहा कि क्या गरीब के बच्चों को पढने का हक नहीं है। उनके तीन नाती पोते उनकी मर्जी से बीदर कर्नाटक के मदरसे में पढते हैं। वहां उनके रहने खाने और शिक्षा की अच्छी व्यवस्था है, इसलिए वे जाते हैं। सरकार अररिया में यही व्यवस्था दे दे। उनका कहना था कि बच्चे को कटनी में रोका गया तो कई दिनों तक बच्चों से बात भी नहीं हो पाई। उनका बेटा इस सदमे से बीमार हो गया और अब अस्पताल में है। उनकी मांग है कि सरकार दोषियों पर कारवाई करे।
कारवाई से बच्चों की शिक्षा पर असर
अभिभावक शौकत ने कहा कि प्रशासन के पास कोई ठोस सबूत नहीं था फिर भी उन्होंने बच्चों को रोक लिया। उन्होंने कहा कि जब वह खुद कटनी बच्चे को लेने पहुंचे तो बच्चे को उनके हवाले क्यों नहीं किए गए। सोशल इन्वेस्टीगेशन रिपोर्ट की प्रक्रिया दो बार की गई, जिसमे काफी वक्त लग गया। अगर स्थानीय संगठनों ने मदद नहीं की होती तो बच्चों को छुड़ाने में काफी वक्त लगता। उन्होंने कहा कि इस कारवाई से बच्चों की शिक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
बाल कल्याण समिति ने विधि उल्लंघन का लगाया आरोप, समिति ने कहा : बच्चों की सुरक्षा का सवाल, जांच की मांग
इस मामले में बाल कल्याण समिति कटनी ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने पटना के समाज कल्याण विभाग को पत्र के संलग्न सूची में विधिक आधार से संबंधित प्रक्रिया व उक्त प्रकरण में नियमानुसार विधि उल्लंघन परिलक्षित होने की बात कही है। पत्र में कहा गया है कि बिना वैध दस्तावेज 165 नाबालिग बच्चे अपने घरों से 1800 किलोमीटर दूर आवासीय मदरसे में कैसे भेजे गए। यह अवैध अंडरटेकिंग व बाल अधिकारों का उल्लंघन है। बाल कल्याण समिति ने कहा कि 11 अप्रैल को पटना-पुणे एक्सप्रेस से बिहार के अररिया, सुपौल, किशनगंज व पूर्णिया से संदिग्ध परिस्थिति में यात्रा कर रहे 165 बच्चों को आरपीएफ, जीआरपी, महिला व बाल विकास द्वारा रेस्क्यू किया गया। बच्चों को लातूर महाराष्ट्र के मदरसे में ले जाया जा रहा था। बच्चों को ले जाने वाले सद्दाम हाफिज सहित अन्य के पास अभिभावकों की सहमति लिखित में नहीं थी एवं न ही कोई ठोस दस्तावेज थे। सद्दाम हाफिज के पास 100 बच्चों का उर्दू भाषा में भरा हुआ फार्म था, जो मदरसे की ओर से भराया गया था। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष योगेश सिंह बघेल, टीम में शामिल कनक शर्मा, दुर्गेश मरेया, कमलेश कुमार पटेल व दीपा बर्मन ने कहा कि बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए 6 बिंदुओं पर कार्यवाही संपादित कराना अब आवश्यक प्रतीत हो रहा है। जिसमे प्रकरण की तत्काल व निष्पक्ष जांच कराई जाए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए निकटस्थ विद्यालय में स्थानांतरित किया जाए। संबंधित संस्था अथवा मदरसे एवं बच्चों को ले जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। इस प्रकार की अवैध अंडरटेकिंग पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। बाल कल्याण समिति ने आवश्यक साक्ष्य के साथ दस्तावेज संलग्न कर समाज कल्याण विभाग पटना को अग्रिम कार्यवाही के लिए पत्र प्रेषित किया है।

 

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