डिंडोरी के लाल का कमाल :एआई का ‘देसी अवतार’; इंटरनेट से सीखकर शिवम ने बनाया बहुभाषी ह्यूमनॉइड रोबोट… देखें पूरा वीडियो

यशभारत डिंडोरी । डिण्डौरी जिले में आदिवासी बाहुल्य डिण्डौरी जिले के शहपुरा विकासखंड स्थित ग्राम करौंदी के युवा नवप्रवर्तक शिवम साहू ने सीमित संसाधनों में एक ऐसा एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार किया है, जो हिंदी, अंग्रेज़ी सहित कई भाषाओं में लोगों से संवाद करने की क्षमता रखता है। ग्रामीण परिवेश में विकसित इस तकनीक ने क्षेत्रभर में उत्सुकता और चर्चा का विषय बना दिया है।
शिवम साहू ने अपने घर के एक कमरे को प्रयोगशाला का रूप देकर इस रोबोट का निर्माण किया है। अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित यह रोबोट उपयोगकर्ता की आवाज़ पहचानने, प्रश्नों को समझने और उसके अनुरूप जवाब देने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल पूर्व निर्धारित उत्तर नहीं देता, बल्कि उपलब्ध एआई तकनीक की सहायता से प्रश्नों का विश्लेषण कर प्रतिक्रिया देता है।
शिवम के अनुसार रोबोट के निर्माण में अब तक लगभग एक लाख रुपये की लागत आ चुकी है। इसमें उपयोग होने वाले कई उपकरण ऑनलाइन मंगवाए गए, जबकि कुछ पुर्जों को उन्होंने स्वयं डिजाइन कर तैयार किया। संसाधनों की कमी के बावजूद लगातार परीक्षण और सुधार के बाद यह रोबोट वर्तमान स्वरूप में तैयार हो पाया है।
ज्ञानगंगा इंजीनियरिंग कॉलेज, जबलपुर से बीटेक की पढ़ाई कर चुके शिवम की रुचि इंजीनियरिंग के दौरान ही रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ी। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने नौकरी के बजाय नवाचार और शोध को प्राथमिकता दी। इससे पहले भी वे कमांड बेस्ड रोबोट और ड्रोन तैयार कर चुके हैं, जिनकी स्थानीय स्तर पर सराहना हुई थी।
शिवम बताते हैं कि इंटरनेट उनके लिए सीखने का सबसे बड़ा माध्यम रहा है। ऑनलाइन अध्ययन और स्वयं के प्रयोगों के आधार पर उन्होंने रोबोटिक्स एवं एआई से जुड़ी अधिकांश तकनीकी जानकारियां हासिल की हैं। वर्तमान में उनके घर का एक कमरा शोध केंद्र और कार्यशाला के रूप में उपयोग हो रहा है, जहां वे नए-नए तकनीकी प्रयोग करते रहते हैं।
उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य केवल रोबोट बनाना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है जो समाज और देश के लिए उपयोगी साबित हो। भविष्य में वे ऐसे एआई रोबोट विकसित करना चाहते हैं जिनका उपयोग आपदा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, रक्षा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और औद्योगिक कार्यों में किया जा सके।
शिवम का कहना है कि उनका शोध अभी प्रारंभिक चरण में है और वे लगातार रोबोट में नए फीचर जोड़ने पर कार्य कर रहे हैं। इसके लिए उन्नत उपकरणों, बेहतर कंप्यूटिंग संसाधनों और आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। उनका विश्वास है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवाओं को उचित संसाधन और मार्गदर्शन मिले तो वे भी विश्वस्तरीय तकनीक विकसित कर सकते हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में शामिल होगी। ऐसे समय में डिण्डौरी जैसे जिले के एक युवा द्वारा इस क्षेत्र में किया गया प्रयास न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
शिवम साहू की यह उपलब्धि साबित करती है कि प्रतिभा बड़े शहरों या महंगे संस्थानों की मोहताज नहीं होती। सीखने की लगन, नवाचार की सोच और दृढ़ संकल्प के बल पर गांव का एक साधारण कमरा भी अत्याधुनिक एआई लैब में बदला जा सकता है।







