जातिगत जनगणना के प्रारूप पर कांग्रेस ने उठाए सवाल अजय कुमार बोले सही गिनती और आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं

जातिगत जनगणना के प्रारूप पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
अजय कुमार बोले सही गिनती और आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं
भोपाल, यश भारत। जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए इसमें मूलभूत सुधार की मांग की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार ने शनिवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर कहा कि गलत आंकड़ों का सीधा असर पिछड़े दलित आदिवासी और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों पर पड़ेगा। मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर नई प्रश्नावली तैयार करने और जातियों की प्रमाणित सूची को ड्रॉपडाउन व्यवस्था में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ओपन एंडेड व्यवस्था में एक ही जाति के अलग अलग नाम उपनाम स्थानीय बोलियां और वर्तनी दर्ज होने से आंकड़ों में विसंगति की आशंका है। उन्होंने 2011 का हवाला देते हुए कहा कि उस समय 46 लाख से अधिक जातिगत प्रविष्टियां सामने आई थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में ओवीसी और ईवीसी समुदायों की वास्तविक संख्या और सामाजिक आर्थिक स्थिति का प्रमाणिक आंकड़ा कैसे सामने आएगा। उन्होंने कहा कि सही जनसंख्या आंकड़ों के अभाव में आरक्षण शिक्षा छात्रवृत्ति रोजगार और सरकारी योजनाओं में हिस्सेदारी की न्यायसंगत समीक्षा मुश्किल होगी। उनका कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के पास प्रमाणित जाति सूचियां उपलब्ध हैं इसके बावजूद ड्रॉपडाउन सूची का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से राजनीतिक दलों विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से चर्चा कर प्रारूप में सुधार की मांग की। साथ ही कहा कि सही जनगणना ही सही हिस्सेदारी और सामाजिक न्याय का आधार है।







