दमोह। छिंदवाड़ा जिले में हुई बच्चों की मौत के मामले में संदिग्ध दवा के संबंध में जांच तेज कर दी गई है। इसी कड़ी में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के निर्देश पर एक जांच टीम गठित की गई, जिसमें सहायक कलेक्टर ऋषिकेश ठाकरे, एसडीएम आर.एल. बागरी, डिप्टी कलेक्टर रचना प्रजापति, सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल और डीएचओ डॉ. रीता चटर्जी शामिल रहे।
टीम ने आज टंडन बगीचा स्थित माया मेडिकोज़ पर पहुंचकर निरीक्षण किया। यहां श्री सन् कंपनी की दवाओं की जांच की गई। कम्प्यूटर रिकॉर्ड चेक करने पर पता चला कि मेडिकल पर कुल 68 प्रकार की श्री सन् कंपनी की दवाएं दर्ज थीं, जिनमें से वर्तमान में 18 प्रकार की दवाएं ही स्टॉक में मिलीं। टीम ने सभी 18 दवाओं के बैच नंबर और मात्रा की जानकारी एकत्र की।
डॉ. रीता चटर्जी ने बताया कि छिंदवाड़ा में जिस कफ सिरप से बच्चों की मृत्यु हुई थी, वह सिरप माया मेडिकोज़ में उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद सतर्कता बरतते हुए सभी उपलब्ध दवाओं को सील कर आयुष विभाग के कमरे में सुरक्षित स्टोर कर लिया गया है।
माया मेडिकोज़ के संचालक ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से कंपनी से जुड़े हुए हैं और नियमित व्यापार करते हैं। यह मेडिकल संचालक जिले के 23 स्टोर्स को दवाइयों की सप्लाई करता है, जिनमें हटा, बटियागढ़, पथरिया और दमोह सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं।
टीम ने सभी वितरण बिंदुओं की लाइन लिस्ट तैयार कर कलेक्टर को सौंपी, जिसे आगे की कार्रवाई हेतु एसडीएम को भेजा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि जिले में मिलावटी या संदिग्ध दवाओं की बिक्री पूरी तरह रोकी जा सके।