चलो थोड़ा आगे की देख लें….राह चलते-चलते कब हो जाती है भोर पता ही नही चलता, आज अंतिम दिन सड़कों पर भीड़ के नजारे

कटनी। चलो थोड़ा आगे की देख ले… कुछ ऐसे ही भावों के साथ मां जगदम्बे की विभिन्न भाव भंगिमाओं की प्रतिमाओं की एक झलक पाने लोग आगे बढ़ते चले जाते हैं। दूधिया रोशनी से नहाई सड़कों पर जरा भी थकान महसूस नहीं होती। बस हर कदम स्थापना स्थलों की ओर बढ़ता चला जाता है। चलते चले कब शाम से रात और फिर दूसरा तीसरा पहर हो जाता है, पता ही नही चलता। कल अष्टमी को सड़को पर उमड़ा जनसैलाब कटनी के ऐतिहासिक दुर्गोत्सव का साक्षी बन गया। आज नवमी को भी अपार जनमेदिनी सड़कों पर नजर आयेगी। इस बार कटनी के दुर्गा पूजा पर्व में विविधता के दर्शन हो रहे हैं। समितियों ने इस बार न केवल साज सजावट में बल्कि प्रतिमाओं की स्थापना में भी शहर के वाशिंदों को कुछ नया दिया है। कहीं सिंह पर सवार माता रानी भक्तों को दर्शन दे रही हैं तो कहीं परी के रूप में लोगों को मोहित कर रही हैं। कहीं महाकाली के रूप में माता का तेजस्वी स्वरूप देखने मिल रहा है तो कहीं नगर सेठानी के रूप में मां जगदम्बे भक्तों का कल्याण कर रही है। आदर्श कालोनी में उत्तराखंड की प्रसिद्ध धारा देवी, शेर चौक सन्मुख दास गली में विंध्यवासिनी तथा केसीएस में माता ब्रम्हचारिणी के रूप में विराजमान है। झंडाबाजार व्यापारी संघ की मनमोह लेने वाली माता महिषासुर मर्दिनी की विशाल प्रतिमा और चारों ओर चलित मूर्तियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं। गांधी दुर्गा पूजा समिति द्वारा गांधी स्कूल में फूल चुनते हुए मां की झांकी को लेकर अपलक निहारते रह जाते है। पन्ना मोड़ पर आंध्रप्रदेश की संस्कृति पर आधारित मां ममता शक्ति का रूप लोगों को अपनी ओर खीच रहा है। नवयुवक दुर्गा समिति के सदस्यों ने यहां बहुत मेहनत की है। कचहरी चौक पर विराजी माता रानी भी अपनी मनमोहक छवि के साथ लोगों को दर्शन दे रही है। कृषि उपज मंडी में माता के दिव्य दरबार के साथ आकर्षक साज सजावट भी निराली है। गौरतलब का कटनी का दुर्गोत्सव अपनी शानदार परंपरा और लयबद्धता के लिए जाना जाता है। हर वर्ष दुर्गा समितियों बहुत मेहनत और लगन से प्रतिमाओं की स्थापना करते हुए साज सजावट का अनुपम उदाहरण पेश करती हैं। स्थापना स्थलों पर आज रात को अंतिम दर्शन के बाद कल हवन होगा तथा भंडारे के आयोजन होंगे। कन्या भोज के साथ विसर्जन की तैयारी होगी। कल दशहरा चल समारोह के साथ दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हो जाएगा।









