कटनी

ग्रीष्मकालीन अवकाश बन रहा सृजन का अवसर: निगम विद्यालयों में ‘प्रतिभा शिविर’ के माध्यम से तराशी जा रही भावी पीढ़ी

तीन विद्यालयों में 11 दिवसीय प्रशिक्षण से विद्यार्थी हो रहे लाभान्वित, ‘खेल से कौशल तक’ की संकल्पना साकार

ग्रीष्मकालीन अवकाश बन रहा सृजन का अवसर: निगम विद्यालयों में ‘प्रतिभा शिविर’ के माध्यम से तराशी जा रही भावी पीढ़ी

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कटनी,यशभारत। ग्रीष्मकालीन अवकाश को ‘अवकाश’ न मानकर ‘अवसर’ में परिवर्तित करने के संकल्प के साथ नगर पालिक निगम द्वारा संचालित ग्रीष्मकालीन प्रतिभा शिविर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम सिद्ध हो रहा है। निगम के तीन प्रमुख विद्यालयों में 15 जून तक आयोजित इस शिविर में छात्र-छात्राओं की उत्साहजनक सहभागिता निगम प्रशासन की सफलता का द्योतक है। प्रत्येक विद्यार्थी में कोई न कोई अंतर्निहित प्रतिभा अवश्य होती है, आवश्यकता केवल उसे पहचानकर उचित दिशा एवं मंच प्रदान करने की होती है। इसी उद्देश्य से ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग करते हुए विद्यार्थियों को खेल, कला, संगीत, संस्कृति एवं जीवन-कौशल के विविध आयामों से जोड़ा जा रहा है। शिविर का संचालन नगर निगम के साधुराम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, के.सी.एस. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं ए. रवींद्रनाथ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में किया जा रहा है। प्रतिदिन प्रातःकालीन सत्र में विषय-विशेषज्ञों एवं अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविर के छठवें दिवस साधुराम स्कूल में खेल एवं शारीरिक दक्षता संवर्धन की गतिविधियों के अंतर्गत स्केटिंग, वॉलीबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन, कबड्डी एवं टेबल टेनिस का अभ्यास कराया गया। के.सी.एस. स्कूल में पेंटिंग, आर्ट एंड क्राफ्ट, कुकिंग, शतरंज एवं सेल्फ डिफेंस जैसे सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों के सृजनात्मक एवं बौद्धिक कौशल को विकसित किया गया। वहीं ए. रवींद्रनाथ स्कूल में कत्थक, वेस्टर्न डांस, क्लासिकल म्यूजिक, गायन एवं वादन के प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों की सांस्कृतिक अभिरुचि एवं अभिव्यक्ति क्षमता को निखारा जा रहा है।
प्रशिक्षकों के अनुसार शिविर में विद्यार्थियों में नई विधाओं को सीखने के प्रति उत्साह देखने योग्य है। नियमित अभ्यास से उनके आत्मविश्वास, अनुशासन और व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।निगम प्रशासन द्वारा इस प्रकार के रचनात्मक आयोजनों के माध्यम से ‘स्कूल शिक्षा के साथ-साथ कौशल शिक्षा’ की अवधारणा को साकार किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें।

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