क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए तीन महीने का इंतजार, बिल्डिंग का काम पूरा, सुविधाओं के लिए कवायद, कोरोना महामारी के समय बिस्तरों की कमी के बाद सरकार ने दी थी स्वीकृति

कटनी, यशभारत। जिला चिकित्सालय को जल्द ही क्रिटिकल केयर यूनिट की सौगात मिलने जा रही है। करीब 15 करोड़ रूपए की लागत से बिल्डिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है। कोरोना महामारी के दौरान जिला चिकित्सालय में बिस्तरों की कमी के बाद राज्य सरकार द्वारा कटनी जिले में 50 बेड वाले क्रिटिकल केयर यूनिट के निर्माण की मंजूरी दी गई थी। जिला चिकित्सालय में टीकाकरण कक्ष को तोडक़र इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया। हालांकि बिल्डिंग बन जाने के बाद भी अब तक यह शुरू नहीं हो पाया है। क्रिटिकल केयर यूनिट शुरू होने से जिले के मरीजों को बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यूनिट शुरू होने में दो से तीन महीने और लग सकते हैं। बताया जाता है कि क्रिटिकल केयर यूनिट में आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं को शिफ्ट किया जाएगा। इसके साथ ही यहां आइसोलेशन वार्ड और आर्थो (हड्डी रोग) वार्ड भी विकसित किए जा रहे हैं।
16 बेड का आईसीयू और ऑपरेशन थियेटर
सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा ने बताया कि क्रिटिकल केयर के प्रथम तल पर 26 बेड का वार्ड तैयार किया जा रहा है, जबकि द्वितीय तल पर 2 आधुनिक ऑपरेशन थियेटर और 16 बेड का आईसीयू बनाया जा रहा है। इसके अलावा डायलिसिस के लिए 2 बेड की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी, वहीं एक अन्य तल पर 16 बेड का अतिरिक्त आईसीयू भी प्रस्तावित है, जिससे गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता बढ़ेगी।
क्रिटिकल केयर यूनिट
क्रिटिकल केयर यूनिट में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर संक्रमण, दुर्घटना एवं अन्य जटिल बीमारियों से ग्रसित मरीजों का इलाज किया जाता है। खास बात यह है कि यहां 24 घंटे प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में मरीजों का इलाज होता है। अत्याधुनिक मॉनीटरिंग सिस्टम, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता से मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। इस यूनिट में हर मरीज के लिए अलग बेड और विशेष उपकरण उपलब्ध होते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है। समय पर और सटीक उपचार मिलने से गंभीर मरीजों की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इनका कहना है
जिला चिकित्सालय में क्रिटिकल केयर यूनिट जल्द ही शुरू होने जा रही है। कुछ काम बाकी है, जो अतिशीघ्र पूरा कराया जा रहा है। करीब दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। इसके बाद यहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा।
डॉ. यशवंत वर्मा, सिविल सर्जन






