मध्य प्रदेशराज्य

एएनएम भर्ती विवाद में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, तत्कालीन सीएमएचओ समेत दो अधिकारियों को नोटिस

सतना यश भारत । महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएनएम) भर्ती परीक्षा-2023 से जुड़े विवाद में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. एल.के. तिवारी और प्रशासनिक अधिकारी साविन्द्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों पर अभ्यर्थी के दस्तावेजों के परीक्षण एवं नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं।

 

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा 18 जून को जारी नोटिस में दोनों अधिकारियों से तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

जानकारी के अनुसार महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता समूह-5 भर्ती परीक्षा के तहत चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन के लिए नवंबर 2024 में जिला स्तर पर विभागीय छननी समिति का गठन किया गया था। समिति का दायित्व अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेजों की जांच कर उनकी पात्रता सुनिश्चित करना था।

 

मामला तब विवादों में आया जब अभ्यर्थी नाहिदा खातून को दस्तावेज परीक्षण के बाद अपात्र घोषित कर दिया गया और वह नियुक्ति से वंचित रह गईं। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट जबलपुर की शरण ली। न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज परीक्षण में हुई कथित त्रुटियों और लापरवाही का मामला सामने आया।

 

संचालनालय का कहना है कि यदि दस्तावेजों का परीक्षण निर्धारित नियमों एवं आवश्यक सावधानी के साथ किया गया होता तो अभ्यर्थी की पात्रता या अपात्रता का निर्णय प्रारंभिक स्तर पर ही स्पष्ट हो जाता। इससे न केवल विवाद टल सकता था बल्कि विभाग को न्यायालयीन कार्यवाही का सामना भी नहीं करना पड़ता।

 

विभाग ने माना है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती गई, जिसके कारण भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई और प्रशासनिक असहज स्थिति उत्पन्न हुई।

अलग-अलग नियमों के तहत प्रस्तावित कार्रवाई

तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. एल.के. तिवारी, जो वर्तमान में संविलियन पद पर कार्यरत हैं, को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के तहत नोटिस जारी किया गया है। वहीं प्रशासनिक अधिकारी एवं विभागीय छननी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष साविन्द्र सिंह के विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।

 

जवाब नहीं देने पर होगी एकपक्षीय कार्रवाई

संचालनालय ने दोनों अधिकारियों को क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, रीवा के माध्यम से निर्धारित अवधि में अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि समय सीमा में जवाब प्राप्त नहीं होने पर यह मान लिया जाएगा कि संबंधित अधिकारियों को अपने पक्ष में कुछ नहीं कहना है और उनके विरुद्ध एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई ने जिला स्तर पर होने वाली भर्ती प्रक्रियाओं में दस्तावेज सत्यापन की पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया में छोटी सी लापरवाही भी बड़े विवाद और न्यायालयीन मामलों का कारण बन सकती है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

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