आंशिक बंद रहा शहर, मिला-जुला असर, पीपीपी मॉडल का विरोध, सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग, हर वर्ग का मिला समर्थन

कटनी, यशभारत। जिले में पीपीपी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखे जाने की तैयारियों के बीच इसका विरोध भी शुरु हो गया है। जिसको लेकर आज कटनी बंद का आव्हान किया गया है। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ ही राजनीतिक दलों के लोगों ने आज सुबह शहर के अलग-अलग हिस्सो में रैली व मंच लगाकर कटनी बंद रखने का आव्हान किया। इस दौरान सुबह 12 बजे शहर7 आंशिक रूप से बंद रहा और इसका मिला-जुलाकर असर देखने को मिला। कटनी का बाजार आम दिनों में 11 बजे के बाद ही खुलता है, लेकिन आज बंद के आव्हान के चलते बस स्टैंड, आजाद चौक, झंड़ा बाजार, गोल बाजार, सुभाष चौक, सराफा बाजार, कृषि उपज मंडी सहित उपनगरीय क्षेत्र में बंद का आंशिक असर देखा गया। शहर की मुख्य सडक़ों में दुकानें कहीं आधी तो कहीं पूरी खुली दिखी लेकिन दोपहर 12 बजे तक बाजार में कामकाज बंद सा ही रहा। इस अवसर पर संदीप नायक, विन्देश्वरी पटेल, सचिन शर्मा, आशीष कछवाहा, मोखे भाई, प्रभात पांडे, हेमंत श्रीवास्तव सहित लगभग 50 से ज्यादा सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग हिस्सों में टीम बनाकर दुकानदारों से जनहित में आज व्यापार बंद रखने का आह्वान किया।
कल निकाला गया मशाल जुलूस
स्टेशन चौराहे से काले झंडे के साथ मशाल जुलूस निकाला और अगले दिन मंगलवार को कटनी बंद के आव्हान पर लोगों का समर्थन मांगा। राज्य शासन द्वारा मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने के निर्णय ने स्थानीय स्तर पर असंतोष पैदा कर दिया है। शहरवासियों और विभिन्न संगठनों का स्पष्ट कहना है कि कटनी को निजी हाथों के भरोसे वाला नहीं, बल्कि पूर्णत: शासकीय मेडिकल कॉलेज चाहिए। स्थानीय लोगों और आंदोलनकारियों का तर्क है कि पीपीपी मॉडल से आम जनता को वह लाभ नहीं मिल पाएगा जो एक विशुद्ध सरकारी संस्थान से मिलता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निजी भागीदारी होने से जांच और इलाज के शुल्क बढऩे की आशंका है। सरकारी कोटे की सीटों में कमी आएगी और भारी डोनेशन की मांग बढ़ेगी। सरकारी जमीन और संसाधनों का लाभ निजी कंपनियां उठाएंगी।
पीपीपी मेडिकल कॉलेज मेें होगा मरीजों का फ्री इलाज : विधायक
पीपीपी मेडिकल कॉलेज के विरोध और सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग लेकर आज मंगलवार को आयोजित बंद के बीच क्षेत्र के विधायक संदीप जायसवाल ने कहा कि पीपीपी मेडिकल कॉलेज में भी गरीब मरीजों का नि:शुल्क उपचार होगा। एग्रीमेंट में बकायदा इस बात का जिक्र किया गया है, इसके बाद भी कई तरह की बातों का प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय भी यह मुद्दा उठा था। उस समय भी मैंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि कटनी को मेडिकल कॉलेज न मिलना मेरी राजनीतिक विफलता है। मैंने इ स बात को स्वीकार किया था, इसके बाद ट्रिपल पी मॉडल का मेडिकल कॉलेज आया, तब मैने विधानसभा में अपनी बात रखी थी और मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि हमारा शासकीय मेडिकल कॉलेज इस तरह से निजी हाथों में जाएगा तो गरीबों के इलाज में व्यावहारिक कठिनाई आएगी। उसके बाद मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री ने साउथ स्टेशन के कार्यक्रम में बात यह बात मंच से कही थी कि विधायक की आपत्ति के बाद संशोधन हो गया है। विधायक ने कहा कि अब आज की तारीख में जिला अस्पताल का जो मैनेजमेंट है , जो व्यवस्था है, वह प्रभारी सिविल सर्जन और एक कमेटी करेगी, जिसमें कलेक्टर की अध्यक्षता रहेगी। कटनी में साढ़े 3 सौ बिस्तरों का अस्पताल है। प्रदेश सरकार ने भी साफ कर दिया है कि जितने बिस्तर का अस्पताल है, उतने मरीजों का नि:शुल्क इलाज होगा और एग्रीमेंट के तहत जितने बेड बनाए जाएंगे, उसमे भी 75 प्रतिशत मरीजों का फ्री इलाज होगा। इसके अलावा मरीजों को कई तरह की सुविधाएं भी मिलेंगी। विधायक संदीप जायसवाल ने कहा कि पीपीपी मेडिकल कॉलेज को लेकर कुछ लोग मेरे पास आए थे। मैने उनसे यही कहा था कि पीपीपी मेडिकल कॉलेज स्वीकृत होने के साथ ही सरकारी मेडिकल कॉलेज की भी मांग की जा रही है। कटनी में यदि दोनों आए जाएं और अच्छा रहेगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं ट्रिपल पी मेडिकल कॉलेज को वापस कर दें, यह कटनी की जनता के साथ कहां तक न्याय होगा।







