अब जमीन के बदले मुआवजा नहीं, जमीन ही मिलेगी, गुजरात का फॉर्मूला अपना रही एमपी सरकार

कटनी, यशभारत। मध्यप्रदेश में अब सरकारी प्रोजेक्ट में लेटलतीफी नहीं होगी। जमीनों के अधिग्रहण में ही प्रोजेक्ट कई साल तक लटके रहते थे, वहीं जमीन मालिक को भी ये शिकायत रहती थी कि सरकार ने सही मुआवजा नहीं दिया। उनकी जमीन ज्यादा कीमती या उपजाऊ थी और उन्हें कम मुआवजा मिला। अब सरकारी प्रोजेक्ट को लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण की बजाय सरकार लैंड पूलिंग करेगी। इसके लिए सोमवार को विधानसभा में सरकार ने जमीनों के अधिग्रहण करने वाले कानून में बदलाव का विधेयक पेश किया है। विधेयक पारित होने पर सरकार जमीन के बदले उसके मालिक को 50 फीसदी जमीन विकसित करके देगी। वो भी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के साथ।
इसका बड़ा फायदा ये भी होगा कि अभी नॉन-प्लानिंग एरिया में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण जैसी संस्थाएं ही सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्कर या हाउसिंग प्रोजेक्ट ला सकती हैं। अब इस एकाधिकार को खत्म कर सभी सरकारी विभागों के लिए निवेश के द्वार खोल दिए गए हैं। हालांकि, ऐसे प्रोजेक्ट 500 करोड़ रुपए से कम लागत के नहीं होंगे।
नए प्रावधान के मुताबिक, ऐसे विशेष क्षेत्र जिन्हें 40 हेक्टेयर या इससे अधिक क्षेत्र में विकसित किया जाना है, वहां सरकारी एजेंसियां 500 करोड़ या अधिक की विकास परियोजनाओं पर काम कर सकेंगी। अब नए प्रावधान के तहत संबंधित प्राधिकरण को एक प्लानिंग तैयार करनी होगी, जिसे राज्य शासन के पास लाकर अनुमति लेनी होगी। मध्यप्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण मामले में गुजरात के फॉर्मूले को अपनाने का निर्णय लिया है। दरअसल, मध्यप्रदेश शासन के अधिकारी गुजरात गए थे। जहां उन्होंने इस स्कीम के बारे में सारी जानकारी हासिल की है। उसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने भूमि अधियग्रहण मामले में गुजरात फार्मूले को लागू करने का फैसला लिया। जिसके तहत पूरे परियोजना क्षेत्र को विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण घोषित करके जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाएगा। इस तरह का कानून महाराष्ट्र में भी लागू है।
सरकार और जमीन मालिक दोनों का फायदा
नगरीय विकास एवं आवास विभाग का कहना है कि यदि किसी प्रोजेक्ट के लिए सरकारी एजेंसी के पास फंड नहीं है तो प्रोजेक्ट के दायरे में आने वाली निजी जमीन खरीदने की दरकार नहीं होगी। इसी तरह निजी जमीन के मालिक को विकसित जमीन मिलेगी तो उसकी कीमत बढ़ जाएगी। प्रावधान के मुताबिक, विशेष क्षेत्र के दायरे में आने वाली 50 फीसदी जमीन का उपयोग करने के लिए प्रोजेक्ट के लेआउट में तय होगा कि इसका व्यवसायिक अथवा आवासीय या अन्य उपयोग होगा। यदि तीन में से सिर्फ एक के लिए जमीन का उपयोग किया जाता है तो स्थानीय निकाय से अनुमति अनिवार्य रहेगी। लेकिन तीनों श्रेणियों में उपयोग करने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति लेनी होगी।
500 करोड़ से अधिक या 40 हेक्टेयर के प्रोजेक्ट पर लागू होगा
प्लानिंग एरिया के बाहर हाउसिंग बोर्ड और पीडब्ल्यूडी ला सकेंगे प्रोजेक्ट
सरकार की तरफ से सोमवार को नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम (टीएंडसीपी) कानून में संशोधन बिल विधानसभा में पेश किया गया। सरकार ने नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 में नई धारा 66 (क) जोड़ी है। इसमें प्रावधान किया गया है कि किसी भी परियोजना की जमीन को लैंड पुलिंग स्कीम में शामिल किया जा सकता है। शहरी सीमा के अंदर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित होने वाले विशेष क्षेत्रों के विकास के लिए अब विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) जैसी एजेंसी के गठन की जरूरत नहीं होगी। ये काम हाउसिंग बोर्ड, विकास प्राधिकरण, पुलिस हाउसिंग और पीडब्ल्यूडी करेगा। इसके साथ ही प्राधिकरण जैसे बीडीए, आईडीए शहर के योजना क्षेत्र यानी प्लानिंग एरिया के बाहर भी रोड, पुल, पुलिया समेत अन्य विकास कार्य समेत कॉलोनियां काट सकेंगे। वहीं विकास प्राधिकरण शहर के अंदर विकास कार्य कर सकेगा। अभी पचमढ़ी समेत मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में विकास के लिए साडा है। यहां दूसरी एजेंसी काम नहीं कर सकती।








