अंतिम सफर पर श्याम शर्मा : ताजिंदगी कांग्रेस के लिए रहे निष्ठावान, अपनी बेबाक लेखनी से शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को दिखाते रहे आईना

कटनी, यशभारत। कांग्रेस नेता श्याम शर्मा उन शख्सियतों में से थे, जिन्हें कटनी शहर की आवश्यकताओं और विकास की गहरी समझ थी। वे सोशल मीडिया पर विशेष तौर पर सक्रिय रहते थे और अपनी बेबाक लेखनी से शासन प्रशासन तथा कटनी के जनप्रतिनिधियों को आईना दिखाते रहते थे। उनके सुझावों पर अमल करने का अनेक मौकों पर प्रशासन को लाभ भी हुआ। उनकी निष्ठा जीवन पर्यंत कांग्रेस के साथ बनी रही। वे शहर कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने पार्टी के अनेक पदों पर काम किया। सत्तापक्ष के साथ वैचारिक टकराव के बावजूद उनकी मर्यादित भाषा शैली और तल्ख टिप्पणियों की सभी प्रशंसा करते थे। श्याम शर्मा अपने पीछे दो बेटियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। यूथ हॉस्टल से जुड़े गोपाल शर्मा के वे अग्रज थे।
उनके निधन की खबर से सभी स्तब्ध रह गए। वे करीब 80 वर्ष के थे तथा कुछ समय से फेफड़ों से संबंधित बीमारी की वजह से अस्वस्थ चल रहे थे। सांस लेने में तकलीफ की वजह से उन्हें जबलपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत बिगड़ती गई। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन कल रात चिकित्सकों ने जवाब देते हुए परिजनों को घर ले जाने की सलाह दे दी। कटनी लाते समय रास्ते में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे दो बेटियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। यूथ हॉस्टल से जुड़े गोपाल शर्मा के वे अग्रज थे।
उनको स्मरण करते हुए मैं एक निजी वाक्या भी अपनी इस पोस्ट में साझा कर रहा हूं। वे मेरे वॉट्सएप ग्रुप सिटी अपडेट से जुड़े रहकर सक्रिय रहते थे। अपने मनोभावों को व्यक्त करने के माध्यम के बतौर उन्होंने सोशल मीडिया के प्लेटफार्म को चुना। उनकी पोस्ट हमेशा सकारात्मक होती थी, अव्यवस्था और अराजकता के खिलाफ। एक दिन शहर के विकास से जुड़े एक विषय पर ग्रुप के अन्य मेंबर्स से उनका तीखा संवाद हो गया, इससे वे इतने व्यथित हुए कि मेरे पास फोन करके उन्होंने कहा कि मैं अब तुम्हारे सिटी अपडेट ग्रुप से कुछ दिन का विश्राम चाहता हूं। हमने उनसे आग्रह किया कि आप ग्रुप से लेफ्ट मत होइए। आपके मार्गदर्शन की मुझे भी और ग्रुप को भी बहुत जरूरत है। इतना कहते ही एक मुस्कान के साथ उन्होंने मेरा हालचाल पूछा और फोन रख दिया। अक्सर वे शहर के विकास से जुड़े मामलों को लेकर बातचीत करते थे। खुदसे फोन लगा लेने में उन्हें कोई गुरेज नहीं था। यशभारत के वे नियमित पाठक और शुभचिंतक थे। अखबार में कोई त्रुटि हो जाती तो जागरूक पाठक की भांति उनका फोन जरूर आता। मैं उन्हें चाचा कहकर संबोधित करता था। अब श्याम चाचा अनंत यात्रा पर निकल चुके हैं….उनकी यादें हमेशा रुलायेगी। विनम्र श्रद्धांजलि।
*आशीष सोनी*
संपादक, यशभारत






