स्टेशन पर 18 घंटे से पानी का अकाल,यात्री बेहाल,स्टॉल वालों की चांदी
सुलभ कॉम्प्लेक्स में भी हाहाकार.ललपुर में पाइपलाइन फूटने से बढ़ी परेशानी

जबलपुर यशभारत। मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एवं शौचालयों में बिगत 18 घंटे से पानी की आपूर्ति बंद हुए 18 घंटे बीत चुके हैं और हालात यह हैं कि यात्री बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक ललपुर में पाइपलाइन फूट जाने के कारण यह स्थिति निर्मित हुई है जिसका सुधार कर चल रहा है। इधर 18 घंटे से स्टेशन में में पानी की सप्लाई बंद होने पर प्लेटफार्म पर लगी पाइपलाइन से लेकर प्रतीक्षालय तक पानी का नामोनिशान नहीं है।गत सायं से लेकर समाचार लिखे जाने तक पानी न मिलने की वजह से यात्रियों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
शौचालय में फैल रही गंदगी
यात्रियों का कहना है कि गर्मी और उमस के बीच न पीने का पानी मिल रहा है और न ही उपयोग का। स्थिति इतनी विकट है कि स्टेशन परिसर में बने सुलभ कॉम्प्लेक्स में भी पानी नहीं होने से लोग बुरी तरह परेशान हो गए हैं। शौचालयों में गंदगी फैलने लगी है और स्नानगृहों में ताला लगाना पड़ा है। कई यात्री अपने छोटे बच्चों के साथ पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए।
ऊंचे दामों में बिक रहा पानी
लंबी दूरी की ट्रेनों से आने-जाने वाले यात्री सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई लोगों ने बताया कि पानी के लिए उन्हें प्लेटफार्म छोड़कर स्टेशन के बाहर दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां बोतलबंद पानी ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है। यह स्थिति रेलवे की यात्रियों के प्रति संवेदनहीनता को उजागर करती है।
सप्लाई ठीक करने का काम जारी है
रेल प्रशासन का रवैया भी लापरवाही भरा दिखाई दे रहा है। 18 घंटे बीत जाने के बाद भी न तो वैकल्पिक व्यवस्था की गई और न ही यात्रियों को कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। वहीं इस संबंध में स्टेशन के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि सप्लाई लाइन में तकनीकी खराबी आई है, जिसे ठीक करने का काम जारी है। मगर यात्रियों का सवाल है कि आखिर इतने बड़े स्टेशन पर आपातकालीन योजना क्यों नहीं है।
यात्रियों का फूट रहा गुस्सा
मुख्य रेलवे स्टेशन में गत सायं 6 बजे से पानी की किल्लत से जूझ रहे यात्रियों का गुस्सा अब खुलेआम फूट रहा है। हर कोई यही कह रहा है कि रेलवे लाखों यात्रियों से किराया तो समय पर वसूल लेता है, लेकिन बुनियादी सुविधा तक नहीं दे पा रहा। पानी जैसी जरूरत पर रेलवे की यह चुप्पी अब प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।







