जबलपुरमध्य प्रदेश

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में कुलगुरु नियुक्ति विवाद,हाईकोर्ट ने लगाया 5 हजार का जुर्माना

ज़बाब ना पेश करने पर लगाई कॉस्ट

जबलपुर, यश भारत। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु की नियुक्ति को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब और गहरा गया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए जवाब प्रस्तुत करने के लिए अंतिम अवसर देते हुए पांच हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है।

एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर याचिका में कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा की नियुक्ति को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने पक्ष रखा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अनिवार्य नियमों की अनदेखी की गई। दलील दी गई है कि कुलगुरु जैसे गरिमामय पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक अनुभव और निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया, जिससे पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

अनुभव और योग्यता के मापदंडों पर सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय में तर्क रखा कि नियमों के अनुसार कुलगुरु पद के लिए पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्ष का शैक्षणिक अनुभव अनिवार्य है। आरोप है कि प्रो. वर्मा की पूर्व में प्राध्यापक पद पर हुई नियुक्ति भी प्रक्रियात्मक विसंगतियों से ग्रस्त थी।

अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यदि प्राध्यापक पद पर नियुक्ति ही नियमों के अनुरूप नहीं थी, तो उसी आधार पर कुलगुरु पद पर की गई नियुक्ति स्वतः संदेह के घेरे में आ जाती है। इस प्रकार पूरी प्रक्रिया को अवैध घोषित किए जाने की मांग की गई है।

सरकार को अंतिम मोहलत

मामले की सुनवाई कर रहे विशाल धगट की एकलपीठ ने राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रतिवादियों को अप्रैल 2025 में ही नोटिस तामील कर दिया गया था, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।

कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम मोहलत देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां राज्य सरकार का जवाब इस बहुचर्चित विवाद की दिशा तय करेगा।

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