जिन्होंने धान में नहीं दी गोदाम अब उन्हें गेहूं भंडारण देने की तैयारी,असहयोगी और विवादित वेयरहाउस मैपिंग सूची में शामिल
लंबी रिकवरी के बाद भी मिल सकता है गेहूं का केंद्र

जबलपुर, यश भारत। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की तैयारियों के बीच वेयरहाउस चयन और मैपिंग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला उपार्जन समिति द्वारा तैयार की गई वेयरहाउसों की सूची में ऐसे संचालकों को भी शामिल कर लिया गया है, जिनका पिछला रिकॉर्ड विवादित रहा है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
असहयोग करने वाले संचालकों को भी दी गई जगह
सबसे अहम बात यह सामने आई है कि जिन वेयरहाउस संचालकों ने पिछले धान उपार्जन सीजन में भंडारण के लिए अपने गोदाम देने से इंकार कर दिया था, उन्हें भी इस बार गेहूं भंडारण की मैपिंग सूची में शामिल कर लिया गया है। पूर्व में इन संचालकों के असहयोग के कारण प्रशासन को बड़ी संख्या में गोदाम अधिग्रहित करने पड़े थे, जिससे पूरी खरीदी व्यवस्था प्रभावित हुई थी। इसके बावजूद ऐसे संचालकों को फिर से प्राथमिकता देना सहयोगी वेयरहाउस संचालकों के साथ अन्याय माना जा रहा है।
लंबी रिकवरी और घोटाले वाले गोदाम भी सूची में
इतना ही नहीं, सूची में ऐसे वेयरहाउसों को भी शामिल किया गया है जिन पर पूर्व में धान और गेहूं भंडारण में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। इन गोदामों में लंबी रिकवरी के मामले दर्ज हैं और सूखत जिले की औसत से कहीं अधिक पाया गया था। इसके बावजूद इन्हें दोबारा मैपिंग में शामिल करना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि चयन प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड और जवाबदेही को नजरअंदाज किया गया, तो गेहूं खरीदी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह पारदर्शी और निष्पक्ष निर्णय लेते हुए केवल विश्वसनीय और सहयोगी वेयरहाउसों को ही भंडारण की जिम्मेदारी सौंपे, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके।







