भोपाल

उपेक्षित भाजपा नेताओं का फिर बड़ सकता है रुतबा भार्गव   –  भूपेन्द्र और मलैया के बदल सकते हैं दिन 

उपेक्षित भाजपा नेताओं का फिर बड़ सकता है रुतबा भार्गव

–  भूपेन्द्र और मलैया के बदल सकते हैं दिन

भोपाल यशभारत। प्रदेश में जिन नेताओं की सरकार से ले शासन तक में तूती बोलती थी, वे अभी लंबे समय से उपेक्षित होकर अपने क्षत्रों तक सीमित हो गए हैं। ऐसे नेताओं में खासतौर पर बुंदलखंड के नेता शामिल हैं। माना जा रहा है कि अब इन नेताओं को एक बार फिर से आगे लेकर पावरफुल बनाया जाएगा। इसके संकेत हाल ही में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान मिले हैं। कहा जा रहा है कि प्रदेश संगठन के चुनाव के बाद इन नेताओं को सरकार व संगठन में अलग-अलग दायित्व देकर उन्हेें फिर से मुख्यधारा में लगाया जाएगा। दरअसल अभी प्रदेश में ऐसे नेताओं की संख्या आधा दजर्न से अधिक है, जो कभी सत्ता व संगठन दोनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। सरकार का हो फिर संगठन का नेतृत्व बिना इन नेताओं की राय के कोई फैसला नहीं किया जाता था। बीते कुछ सालों में जिस तरह से प्रदेश में राजनैतिक परिस्तिथियां बदली हैं, उससे इन नेताओं की सत्ता व संगठन दोनों में ही पूछ-परख समाप्त कर दी गई। इसकी वजह से अब यही नेता अपने-अपने ही इलाकों तक ही सीमित हो गए हैं। हालत यह है कि यह नेता अहम मौकों पर ही अब नजर आते हैं। इनमें भी खासतौर पर सर्वाधिक उपेक्षित नेताओं की संख्या बुदेंलखंड अंचल की है। जिन नेताओंंं की वापसी एक बार फिर से देखने को मिल सकती है, उनमें लगातार नौ विधानसभा चुनाव जीतने वाले पार्टी के बड़े बा्रह्म्ण चेहरे विधायक पंडित गोपाल भार्गव का नाम भी शामिल है। वे इस सरकार के पहले तक लगातार बड़े विभागों के मंत्री रह चुके हैं। इस बार भाजपा की सरकार बनने के बाद भी उन्हें इस बार मौका नहीं दिया गयाहै। वे इसके पहले कांग्रेस की सरकार के दौरान नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भोपाल दौरे के दौरान जिस तरह से उन्हें पीएमओ के निर्देश के बाद एयरपोर्ट पर स्वागत करने बुलाया गया उससे माना जा रहा है कि जब भी मंत्रिपरिषद का विस्तार या पुर्नगठन होगा, उन्हें सरकार में शामिल किया जा सकता है। इसी तरह से दूसरे नेता हैंद्व भूपेन्द्र सिंह ठाकुर। शिवराज सरकार के दौरान वे सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री रहे हैं। उन्हें भी भार्गव की ही तरह प्रधानमंत्री के प्रवास के दौरान स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर बुलाया गया था। उन्हें भी इस बार सरकार में मंत्री पद से दूर र खा गया है। बाद में उनकी अपने ही क्षेत्र के नेता और सरकार के मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत से छिड़ी राजनीतिक जंग ने उन्हें लगभग हाशिए पर डाल रखा है। वे अपना पक्ष पार्टी के आला नेताओं तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के प्रवास के बाद उनको लेकर भी माना जाने लगा है कि उन्हें एक बार फिर से मुख्य धारा में लाया जा सकता है। यह नेता भी उपेक्षित महाकौशल के बड़े राजनैतिक चेहरों में शामिल अजय विश्नोई का भी हाल उपेक्षित दूसरे नेताओं की तरह है। कभी सरकार में बेहद पावरफुल रहे विश्नोई बीते कई सालों से उपेक्षित बने हुए हैं। वे कई बार अपनी उपेक्षा को लेकर बयानों के माध्यम से नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में उन्हें भी महाकौशल अंचल से मौका दिया जा सकता है। इसी तरह से प्रदेश सरकार की ओर से सर्वाधिक बार बजट पेश करने वाले जयंत मलैया भी उपेक्षित बने हुए हैं। लगभग यही हाल हिंदूवादी नेता जयभान सिंह पवैया भी ग्वालियर चंबल में भाजपा की राजनीति के बड़े चेहरे माने जाते है। वे एक समय ऐसे एकमात्र नेता थे, जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस में रहने के दौरान उन्हें सीधी चुनौती देते थे। लेकिन पिछले कुछ समय से वे भी राजनैतिक रुप से उपेक्षित बने हुए हैं। यह बात अलग है कि अभी उनके पास महाराष्ट्र का सह प्रभार है, लेकिन गृह प्रदेश की राजनीति में अब उनका दखल न के बराबर है।

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