जबलपुरमध्य प्रदेश

संस्कारधानी पर अपराधियों का साया ! गोलियों की गूंज, चाकूबाजी और लूटपाट से दहला जबलपुर

पुलिस की गश्त पर उठे सवाल

जबलपुर, यशभारत। कभी अपनी संस्कृति और शालीनता के लिए पहचाने जाने वाला यह शहर अब अपराधियों के शिकंजे में जकड़ता जा रहा है। लगातार बढ़ती फायरिंग, चाकूबाजी और लूटपाट की वारदातों ने आम नागरिकों को असुरक्षित कर दिया है। अब अपराधियों में न कानून का डर है न ही पुलिस का खौफ। तमंचों से निकलती गोलियों की आवाजें और सड़कों पर खून से रंगी जमीन इस बात की गवाही दे रही है कि अपराध का ग्राफ बेकाबू हो चुका है। पुलिस प्रशासन भले ही गश्त और कार्रवाई का दावा कर रहा हो, मगर हकीकत यह है कि अपराधियों के हौसले दिन-ब-दिन बुलंद हो रहे हैं। शहर में अपराध का ऐसा माहौल बन चुका है कि नागरिक अब खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

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सुरक्षा व्यवस्था चरमराई पुलिस गश्त पर सवाल

अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, शहर में पुलिस गश्त और मुखबिर तंत्र लगभग ठप हो चुका है। गश्त का दावा तो रोज़ होता है लेकिन अपराधियों की धरपकड़ में कमी साफ दिख रही है। अपराधी खुलेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस की मौजूदगी सड़कों पर नदारद नजर आ रही है। नतीजा यह है कि अब लोगों को अपनी सुरक्षा खुद करनी पड़ रही है।

चोरी और लूटपाट की वारदातों में भी उछाल

गोलियों और चाकूबाजी के साथ साथ चोरी और लूट की घटनाओं ने भी रफ्तार पकड़ ली है। लुटेरे अब बुजुर्गों से लेकर पुलिसकर्मियों तक को निशाना बना रहे हैं। पुलिसकर्मी बनकर ठगी करने के मामले भी सामने आ रहे हैं। वहीं, चोर सूने घरों और दुकानों को निशाना बना ताले तोड़ रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि लगभग हर दिन चोरी के मामले दर्ज हो रहे हैं।

ऑनलाइन हथियार बिक्री ने बढ़ाया खतरा

शहर में हो रही चाकूबाजी की एक बड़ी वजह ऑनलाइन धारदार हथियारों की उपलब्धता है। निजी कंपनियों से ऑनलाइन खरीदे गए चाकू सीधे अपराधियों के हाथों में पहुंच रहे हैं। शहर में प्रतिदिन तीन से चार चाकूबाजी की घटनाएं दर्ज हो रही हैं। ऑनलाइन बिक्री पर कोई सख्त नियंत्रण न होने से अपराधियों का आतंक कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है।

हथियार सप्लायरों पर नहीं कसा शिकंजा

पुलिस अवैध हथियार रखने वालों को गिरफ्तार तो कर रही है, लेकिन हथियार सप्लाई करने वालों तक पहुंच बनाने में नाकाम साबित हो रही है। ऑनलाइन हथियार बिक्री पर भी कोई ठोस रोक नहीं लगाई गई है। नतीजतन अपराधियों को आसानी से हथियार मिल रहे हैं और वे वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

हालिया बड़ी वारदातें – गोलियों से दहला शहर

7 अक्टूबर- मदनमहल थाना अंतर्गत बस स्टैंड चौकी से कुछ कदम दूर होटल में घुसे बदमाश ने दुकान संचालक पर रिवॉल्वर तानते हुए तीन फायर किए।
2 अक्टूबर- कांचघर में दुर्गा विसर्जन चल समारोह के दौरान कांग्रेस
और भाजपा समर्थकों में विवाद के बाद दोनों पक्षों ने पांच-पांच राउंड फायरिंग की।
4 अक्टूबर- कमानिया गेट मेन रोड पर तीन गाड़ियों में पहुंचे बदमाशों
ने पिता-पुत्र पर गोलियां बरसाई और तलवार-बका से हमला किया।
दोनों हमले में बाल-बाल बचे।

अपराधियों के बढ़ते हौसले प्रशासन की नाकामी पर उठ रहे सवाल

अपराधियों के बुलंद हौसलों ने पूरे शहर में दहशत का माहौल बना दिया है। सवाल यह है कि अगर सड़कों पर गोली चल रही है, चाकूबाजी आम हो चुकी है, लूटपाट और चोरी हर दिन हो रही है तो फिर गश्त और निगरानी के दावे किस हद तक सही हैं? संस्कारधानी में अपराध अब बेकाबू हो चुका है। केवल गिरफ्तारियों से अपराध पर रोक संभव नहीं। पुलिस को गश्त मजबूत करनी होगी, मुखबिर तंत्र सक्रिय करना होगा और ऑनलाइन हथियारों की बिक्री पर नकेल कसनी होगी। वरना गोलियों और चाकू की धार पर शहर की शांति दम तोड़ सकती है।

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