दिन का सुकून तो गया ही था, अब रात की नींद भी ले गई बिजली,इन्वर्टर भी बने शो-पीस
भीषण गर्मी के बीच अघोषित पावर कट से जनता त्रस्त

जबलपुर, यश भारत। भीषण गर्मी के बीच शहर की लगातार हो रही बिजली कटौती अब लोगों के लिए सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि रोज झेली जाने वाली यातना बन चुकी है। रात होते ही कई कॉलोनियां अंधेरे में डूब जाती हैं और इसके साथ शुरू होता है पसीने, मच्छरों और बेचैनी से भरा लंबा संघर्ष। जनता का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारी एसी कमरों में बैठकर निर्बाध सप्लाई के दावे करते हैं, जबकि जमीन पर लोग घोषित बिल और अघोषित टॉर्चर झेल रहे हैं।
रातभर बार-बार बिजली गुल होने से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही। गहरी नींद टूटने के कारण सुबह सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान आम हो गई है। बंद कमरों में बढ़ती उमस हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ा रही है। पंखे और कूलर बंद होते ही मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है, जिससे घमौरियां, त्वचा रोग और अनिद्रा जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा मार
नवजात और छोटे बच्चों की हालत सबसे ज्यादा खराब हो रही है। अत्यधिक गर्मी और पसीने के कारण बच्चे पूरी रात रोते-बिलखते रहते हैं। कई घरों में माता-पिता हाथ से हवा कर बच्चों को सुलाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर अस्थमा, बीपी और हृदय रोग से पीड़ित बुजुर्ग उमस भरे कमरों में घुटन महसूस कर रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि रात में घबराहट और सांस लेने में तकलीफ के कारण बुजुर्गों को अस्पताल तक ले जाना पड़ रहा है।
विद्यार्थियों की पढ़ाई अंधेरे में
परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए बिजली संकट सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। देर रात पढ़ाई करने वाले छात्र बिजली जाते ही एकाग्रता खो देते हैं। पसीना, मच्छर और अंधेरा पढ़ाई में बड़ी बाधा बन रहे हैं। कई छात्र मोबाइल की टॉर्च और मोमबत्ती के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा सुधार के दावे करने वाली व्यवस्था बच्चों का भविष्य अंधेरे में धकेल रही है।
इन्वर्टर भी बने शो-पीस, सुबह पानी के लिए जंग
मध्यमवर्गीय परिवारों ने राहत के लिए इन्वर्टर खरीदे, लेकिन लंबे पावर कट के कारण वे भी चार्ज नहीं हो पा रहे। अब इन्वर्टर केवल शो-पीस बनकर रह गए हैं। वहीं रातभर बिजली न रहने से पानी की मोटरें बंद रहती हैं और सुबह घरों में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। कई इलाकों में पानी की एक-एक बूंद के लिए विवाद तक की स्थिति बन रही है।







