सिया विवाद की बढ़ती रफ्तार विकास पर न लगा दे ब्रेक

सिया विवाद की बढ़ती रफ्तार विकास पर न लगा दे ब्रेक
विश्लेषण आशीष शुक्ला :
भोपाल यशभारत। इन दिनों राज्य स्तरीय समाघात निवारण प्राधिकरण यानी कि सिया का विवाद बढ़ता जा रहा है। एक तरफ जहां केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सामंजस्य स्थापित करते हुए पर्यावरण संरक्षण के साथ ही साथ विकास की परिकल्पना को साकार करने के लिए सिया का गठन किया गया था, अब वह विकास से कहीं अधिक विवाद के केंद्र बिंदु में बनी हुई है। सिया के अध्यक्ष, सदस्य सचिव और मध्य प्रदेश सरकार में पर्यावरण मंत्रालय के सचिव के बीच विवाद अब विकास की गति पर ब्रेक लगाने लगी है। वैसे तो सिया पर्यावरण के साथ-साथ विकास को तेज गति देने वाला शासकीय अंग है, जहां से तेज गति से अनुमति मिलती है जो खनन और विकास कार्यों को आगे बढ़ती है लेकिन विवाद के चलते यह काम अब रुक सा गया है। सिया की पिछली बैठकों के दौरान जो निर्णय लिए गए थे वे भी विवाद के केंद्र बिंदु में बने ही हुए हैं, वहीं जो फाइल लंबे समय से अटकी हुई थी उन्हें दूसरे कानूनी रास्ते से अनुमति प्रदान कर दी गई, वे भी कहीं ना कहीं अधर में लटकी हुई है, क्योंकि सिया में जो प्रोजेक्ट आते हैं वह बड़े स्तर के होते हैं जिनमें करोड़ का इन्वेस्टमेंट होता है और वर्षों की विकास योजनाएं जुड़ी रहती हैं ऐसे में सिया मंत्रालय के बीच में विवाद के चलते जिन्हें अनुमति नहीं मिली हुई है वह तो परेशान है लेकिन जिन्हें अनुमति मिल गई है वह भी काम शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे कहीं करोड़ का निवेश कानूनी मामलों में ना फंस जाए और अधिकारियों की लड़ाई में निवेश की बली न चढ़ जाए। विवाद की शुरुआत पहले तो मतभेद से हुई जो बाद में मनभेद में बदल गया और फिर अब यह विवाद बंद कमरों से शुरू होकर अब मीडिया और दिल्ली दरबार तक पहुंच गया है। जहां सबकी अपनी-अपनी शिकायत हैं। कोई नियमों की दुहाई दे रहा है तो कोई मनमर्जी की बात कर रहा है, लेकिन इस सबके बीच कहीं न कहीं विकास की गति पर जो ब्रेक लग रहा है उसका नुकसान तो कहीं न कहीं निवेशकों को होगा और फिर आम जनता भी आगे चलकर इसके दायरे में आएगी, क्योंकि बड़े-बड़े प्रोजेक्ट रुके हुए हैं जिन्हें एनओसी का इंतजार है और जिन्हें हरी झंडी मिल भी गई है तो वह इस विवाद के चलते आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।







