
बदहाल हो गए हैं शहर के ट्रांसफॉर्मर
शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं, आग की घटनाओं ने बढ़ाई दहशत
जबलपुर, यश भारत। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मरों की चिंताजनक स्थिति लगातार सामने आ रही है। यश भारत ने चार दिन पहले कई स्थानों पर खुले ट्रांसफॉर्मर, अधूरी फेसिंग, नीचे झुकी हाईटेंशन लाइनें और कमजोर पोलों की स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। विभाग ने दावा किया था कि समीक्षा शुरू कर दी गई है, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी कई लोकेशन पर हालात लगभग जस के तस हैं। कुछ स्थानों पर सुधार कार्य शुरू जरूर हुआ है, लेकिन उसकी रफ्तार बेहद धीमी है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

नई तस्वीरें फिर बता रहीं, सुधार नाममात्र-गोरखपुर, बरबी, मदनमहल मार्ग और आसपास के इलाकों से लोगों ने यश भारत को नई तस्वीरें भेजी हैं, जिनमें ट्रांसफॉर्मर खुले पड़े हैं या सुरक्षा कवच अधूरे हैं। कहीं तार नीचे लटक रहे हैं, कहीं पोल कमजोर हालत में नजर आते हैं। कुछ ट्रांसफॉर्मर जमीन के बेहद नजदीक लगे हैं, जिनसे कभी भी हादसा हो सकता है।

करंट हादसों के बाद भी लापरवाही बरकरार – बीते महीनों
में करंट की घटनाओं ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को दहला दिया था-बरगी हिल्स में मासूमों की मौत, दुर्गा विसर्जन हादसा, शांति नगर की घटना और कई गांवों में मवेशियों की मौत। इसके बावजूद ट्रांसफॉर्मरों की सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। शहर में अधूरा केबलिंग कार्य, खुले गड्ढे और कटे तार लोगों के लिए रोजाना खतरा बने हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में कई पुराने ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड के कारण बार-बार फॉल्ट दे रहे हैं।
बजट स्वीकृत, योजनाएँ भी तैयार पिर भी सुधार धीमा क्यों?
मेंटेनेंस और सुरक्षा के लिए हर साल भारी राशि खर्च होती है, लेकिन सवाल वही कई लोकेशनों पर सुरक्षा कवच क्यों नहीं लगाए गए?
हाईटेंशन लाइनें अब तक नीचे क्यों झुकी हुई हैं। अधूरी केबलिंग का निरीक्षण तेज क्यों नहीं किया गया शिकायत करने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि जवाब मिलता है कार्य प्रगति पर है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहती है।

गाँधी नगर में ट्रांसफॉर्मर में लगी आग, विभाग नदारद पंडित मोतीलाल नेहरू वार्ड के गाजी नगर, मंगन होटल के पास ट्रांसफॉर्मर में देर रात जोरदार आग लग गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत अधारताल डीई को सूचना दी, लेकिन एमपीईबी का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। कई बार कॉल करने के बाद भी विभागीय टीम नहीं आई। क्षेत्रीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आपसी सहयोग से आग बुझाई। बाद में गोहलपुर पुलिस
मौके पर पहुंची, लेकिन ट्रांसफॉर्मर की स्थिति और विभागीय उदासीनता ने लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी। लोगों का कहना है कि कुछ महीने पहले आईएसआई ट्रांसफॉर्मर में इसी तरह रात में अचानक आग लगी थी। ऐसी घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सुधार कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मरों की बदहाली अब बड़ा खतरा बन चुकी है। जिम्मेदार विभाग के दावे और जमीन की सच्चाई में बड़ा फर्क साफदिख रहा है। अगर समय रहते सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।






