जबलपुरमध्य प्रदेश

10 साल से जबलपुर में रह रहा था अफगानी नागरिक, शहर की महिला से किया था निकाह

फर्जी दस्तावेजों से रह रहे 20 से अधिक अफगानी नागरिक, पासपोर्ट घोटाले में बड़ा रैकेट उजागर, दो गिरफ्तार

जबलपुर। राज्य स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे अफगानी नागरिकों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य की तलाश जारी है।

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10 साल से अवैध रूप से रह रहा था अफगानी नागरिक

कार्रवाई के दौरान एटीएस ने अफगानी नागरिक सोहबत खान पिता बदरुद्दीन खान को गिरफ्तार किया, जो करीब 10 वर्षों से जबलपुर में अवैध रूप से रह रहा था। उसने एक स्थानीय महिला से निकाह कर भारतीय पहचान बनाने की कोशिश की और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया था।

जांच में सामने आया कि सोहबत न केवल खुद के लिए बल्कि अन्य अफगानी नागरिकों के लिए भी फर्जी डॉक्युमेंट्स तैयार करवा कर भारतीय पासपोर्ट बनवाने में शामिल था।

जबलपुर से बनवाए फर्जी पते वाले पासपोर्ट

एटीएस को मिली जानकारी के मुताबिक अब तक करीब 20 अफगानी युवकों के पासपोर्ट जबलपुर के फर्जी पते पर बनवाए जाने की जानकारी सामने आई है।

इनमें से अकबर और इक़बाल, जो कि पश्चिम बंगाल के निवासी बताए जा रहे हैं, के पासपोर्ट पहले ही जबलपुर के फर्जी पते से जारी हो चुके हैं।

नेटवर्क में शामिल अन्य सहयोगी भी चिह्नित

पूछताछ में सामने आया कि सोहबत खान फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाने के लिए स्थानीय लोगों और अधिकारियों की मदद ले रहा था। इनकी पहचान करते हुए एटीएस ने दिनेश गर्ग, पिता श्रवण कुमार गर्ग, निवासी विजय नगर जबलपुर को भी गिरफ्तार किया है, जो वन विभाग में वनरक्षक है और पिछले दो वर्षों से कलेक्टर कार्यालय के चुनाव सेल में कार्यरत था।

इसके अलावा महेंद्र कुमार सुखदन, पिता माधव प्रसाद सुखदन, निवासी एपीएन स्कूल के पास, कटंगा, जबलपुर को भी हिरासत में लिया गया है।

10 लाख रुपए से अधिक के लेनदेन के सुराग

एटीएस की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए 10 लाख रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है। इस लेन-देन में पासपोर्ट ऑफिस, पुलिस वेरिफिकेशन और पोस्ट ऑफिस के कुछ लोगों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है।

कौन-कौन है जांच के घेरे में?

जांच एजेंसी अब जाली दस्तावेज़ तैयार करने वालों, पुलिस वेरिफिकेशन में सहयोग करने वाले अधिकारियों, तथा पोस्ट ऑफिस के कर्मचारियों को भी चिह्नित कर रही है जिन्होंने फर्जी पते वाले पासपोर्ट के लिए सहयोग किया।

एटीएस की टीम अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है और जल्द ही अन्य सहयोगियों और अफगानी नागरिकों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

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