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मटर मंडियों में हो रही टैक्स की चोरी

बिना पर्ची के परिसर से बाहर निकल रहीं गाड़ियां

मटर मंडियों में हो रही टैक्स की चोरी
बिना पर्ची के परिसर से बाहर निकल रहीं गाड़ियां

जबलपुर, यश भारत। जिले में मटर की आवक लगातार तेज होती जा रही है और इसके साथ ही मटर मंडियों में मंडी टैक्स की चोरी भी बढ़ती जा रही है। जिले की मंडियों में मटर की खरीद पर व्यापारियों से ?20 प्रति बोरा के हिसाब से टैक्स लिया जाता है, लेकिन आधे से अधिक मटर बिना टैक्स चुकाए ही मंडी परिसर से बाहर भेजी जा रही है। वर्तमान में जबलपुर, पाटन और सहजपुर की मंडियों को प्रतिदिन लगभग 5 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। मटर की आवक और बढ़ने पर यह चोरी 7 से 8 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। इस पूरे खेल में अधिकारियों और व्यापारियों की मिलीभगत बताई जा रही है, वहीं कुछ स्थानों पर राजनीतिक संरक्षण की भी चर्चा है, जहां प्रति गाड़ी के हिसाब से कमीशन पहुंचाया जाता है।
ऐसे होता है खेल
किसानों द्वारा मंडी में बिक्री के लिए लाई गई मटर को आढ़तियों के माध्यम से बाहर के व्यापारी खरीदते हैं और फिर इसे दूसरे जिलों व अन्य राज्यों में भेजा जाता है। इसके लिए मंडी में

जबलपुर, सहजपुर और पाटन मंडी में प्रतिदिन 5 लाख से अधिक का गोलमाल
नहीं आ रहे सामने वास्तविक आंकड़े

टैक्स चोरी के कारण जिले की मटर उपज के वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे हैं। आधा माल बिना टैक्स के बाहर भेजे जाने से वह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाता। इसके चलते जबलपुर की मटर की ब्रांडिंग और उपज के आंकड़े भी कमजोर पड़ते हैं। प्रशासन एक ओर ‘जबलपुरिया मटर’ के नाम से ब्रांडिंग और प्रमोशन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर टैक्स चोरी के चलते वास्तविक उत्पादन छिप जाता है। यह टैक्स चोरी सिर्फमटर तक सीमित नहीं है, इससे जुड़े कई अन्य काले कारनामों के खुलासे आने वाले समय में होने की संभावना है।

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मटर पर ?20 प्रति बोरा के हिसाब से मंडी शुल्क निर्धारित है। यदि वर्तमान
दामों की बात करें तो 10 टन की एक गाड़ी में करीब 180 से 200 बोरी

मटर होती है, जिस पर 3600 से 3800 रुपये तक टैक्स बनता है। लेकिन मंडी गेट पर 300 से 500 रुपये देकर गाड़ियों को बिना मंडी शुल्क चुकाए ही बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे प्रति गाड़ी लगभग 3000 रुपये की टैक्स चोरी हो जाती है। यह खेल आधे से अधिक गाड़ियों पर चल रहा है। तीनों मंडियों से प्रतिदिन 500 से 600 ट्रक निकलते हैं, जिनमें से 300 से कम गाड़ियों पर ही टैक्स चुकाया जा रहा है, बाकी बिना टैक्स के रवाना हो रही हैं।

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