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सिया अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, सचिवालय ने दी स्पष्टीकरण रिपोर्ट

भोपाल, यशभारत। पर्यावरण विभाग के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण के अध्यक्ष पर अनुशासनहीनता, अमर्यादित भाषा के प्रयोग और कार्यालयीन कार्यों में अवरोध उत्पन्न करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्राधिकरण के सचिवालय ने इस संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है, जिसमें कई अहम बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। इस मामले में सिया के अध्यक्ष की कार्यप्राणाली से सभी परेशान हैं। यही वजह है कि यह संस्था अब विवादों में आकर सुर्खियों में बनी हुई है।
केन्द्र सरकार द्वारा 7 जनवरी 2025 को नवीन एसईआईएए प्राधिकरण का गठन किया गया, जिसकी अधिसूचना और कार्यादेश 9 जनवरी 2025 को जारी की गई। इस आदेश के तहत अध्यक्ष और सदस्य को 5000 रुपए परिवहन सहित प्रति बैठक मानदेय एवं एक सर्वसुविधा युक्त कक्ष, कंप्यूटर, प्रिंटर, तकनीकी स्टाफ, सहायक ग्रेड-2 कर्मी और 2 भृत्य भी उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही आवश्यक स्टेशनरी, दस्तावेज व अन्य सामग्री भी समय-समय पर उपलब्ध कराई गई है। एसईआईएए सचिवालय द्वारा पूर्व की भांति सभी कार्य पूरी पारदर्शिता से परिवेश पोर्टल एवं वेबसाइट के माध्यम से संपादित किए जा रहे हैं।

प्रत्येक बैठक में लगभग 20 प्रकरणों का 2000 पृष्ठों का एजेण्डा तैयार कर अध्यक्ष एवं सदस्य को बैठक से पूर्व उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि ये सभी दस्तावेज पोर्टल पर पहले से ही ऑनलाइन उपलब्ध हैं। हार्डकॉपी की अनावश्यक मांग और दस्तावेजी बाधाएं पोर्टल पर दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद अध्यक्ष व सदस्य द्वारा हर दस्तावेज की हार्डकॉपी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का दबाव डाला जाता है।

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सदैव पारदर्शिता और नियमों के तहत कार्य किया -सचिवालय की रिपोर्ट के अनुसार 24फरवरी 2025 की बैठक में 17 प्रकरणों के लिए कार्यवाही जानकारी अध्यक्ष द्वारा तैयार कराया गया और 3 मार्च 2025 को हस्तार वाली प्रति सचिवालय को दी। जब प्रकरण पर सचिवालय द्वारा आपत्ति जताई गई, तब अध्यक्ष और सदस्य ने कहा कि हमने जो हस्ताक्षर कर दिए हैं वही फाइनल हैं, इन्हें बदला नहीं जाएगा। इसके बाद सचिवालय द्वारा इस प्रकरण पर स्वतंत्र मत अंकित करते हुए कार्यवाही विवरण पोर्टल पर 4 मार्च 2025 को अपलोड किया गया। सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि उसने सदैव पारदर्शिता और नियमों के तहत कार्य किया है। सभी प्रकरणों की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध रहती है, फिर भी हार्डकॉपी की मांग एवं लिपिकीय कमियों के बहाने प्रकरणों को रोका जाता है।
व्यर्थ कार्यभार और समय की होती है हानि- लॉगिन आईडी के बावजूद हार्डकॉपी दस्तावेज़ों की अनावश्यक मांग भारत सरकार द्वारा प्रदत्त लॉगिन आईडी के माध्यम से अध्यक्ष एवं सदस्य को परिवेश पोर्टल पर सभी प्रकरणों, एजेण्डा एवं दस्तावेजों की ऑनलाइन पहुँच उपलब्ध है।

इसके बावजूद, वे प्रत्येक दस्तावेज की हार्डकॉपी मांगते हैं, जिससे व्यर्थ कार्यभार और समय की हानि होती है। उसके बाद 24 मार्च 2025 की बैठक हेतु एजेण्डा पूर्वनिर्धारित बैठक कार्यक्रम के अनुसार पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया था, जिसकी सूचना विधिवत ईमेल व लॉगिन पर भेज दी गई थी। उसके बावजूद अध्यक्ष द्वारा एजेण्डा को असत्य व कूटरचित बताना अनुचित है। इसी वर्ष 24 मार्च की बैठक हेतु एजेण्डा समय पर पोर्टल पर अपलोड किया गया था तथा दोनो को ईमेल व लॉगिन पर इसकी सूचना दी। फिर भी बैठक में इसे मनमाना व कूटरचित कहा गया, जबकि वे स्वयं उक्त तिथि को एप्को सभागार में उपस्थित थे। बैठक न करने का कारण हार्डकॉपी और कक्ष उपलब्ध न होना बताया गया। सभी अलग से कक्ष व ऑफिस सेटअप की मांग करते हैं 2008 से 2024 तक किसी भी सदस्य को अलग से कमरा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

अलग कक्ष की माँग, कार्यवाही में डालते हैंअड़चन

शासन द्वारा लॉजिस्टिक सपोर्ट के अनुसार एप्को कार्यालय में पहले से उपलब्ध हैं। इसके बावजूद सदस्य बार -बार अलग कक्ष की माँग करते हैं और न मिलने पर कार्यवाही में अड़चन डालते हैं। फाइलें अध्यक्ष को समय पर भेजी जाती हैं, लेकिन वे न तो ईमेल का उत्तर देते हैं, न ही नस्तियों को शीघ्रता से वापिस करते हैं। इससे एजेण्डा प्रस्तुति बाधित होती है और नयी नस्ती प्रस्तुत करनी पड़ती है। अध्यक्ष और सदस्य के कारण प्राधिकरण की कई महत्वपूर्ण बैठकें समय पर आयोजित नहीं हो पा रही हैं, जिससे शासकीय परियोजनाएं, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार डीईआईएए, औद्योगिक क्षेत्र व खनिज ब्लॉक संबंधित प्रकरणों का निराकरण लंबित हो रहा है। जानबूझकर कार्य में बाधा एवं नस्ती रोके रखना अधिकारिक तौर पर हस्ताक्षरकर्ता द्वारा ई-मेल एवं फिजिकल नस्ती समय पर अध्यक्ष को प्रेषित की जाती है, परंतु वे जानबूझकर ईमेल का कोई उत्तर नहीं देते एवं नस्ती को लम्बे समय तक रोके रखते हैं। परिणामस्वरूप अन्य एजेंडा अलग नस्ती पर प्रस्तुत करना पड़ता है और उसे भी मूल नस्ती के साथ प्रस्तुत किया जाए कहकर अस्वीकार किया जाता है।

खुद निर्णय लेकर कार्यवाही के विवरण पर हस्ताक्षर

अध्यक्ष एवं सदस्य बैठक में खुद निर्णय लेकर कार्यवाही के विवरण पर हस्ताक्षर किए जाते हैं, ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण के उपरांत ही पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। उसके बाद भी यह लोग अपने निर्णयों से पल्ला झाड़ लेते हैं और कहते हैं कि ये निर्णय हमने नहीं लिया। हार्डकॉपी की अनुचित मांग व बैठक से पलायन एजेंडा ऑनलाइन उपलब्ध होने के बावजूद बैठक से पहले हार्डकॉपी नहीं मिलने का बहाना बनाकर बैठक छोड़ दी जाती है, जबकि सभी सूचनाएँ समय पर प्रेषित की जाती हैं।

बार-बार अपमानजनक व असंवैधानिक भाषा का प्रयोग

अध्यक्ष द्वारा सचिवालय स्टाफ के समक्ष बार-बार अपमानजनक व असंवैधानिक भाषा का प्रयोग किया जाता है। यहाँ तक कहा गया मैं तुम्हारा करियर बर्बाद कर दूंगा। एक जैसे प्रकृति के प्रकरणों में अलग-अलग निर्णय लिये जाते हैं, कई बार एक ही प्रकरण को बार-बार पुन: परीक्षण हेतु भेजा जाता है, जबकि स्पष्ट निर्णय लिए जा सकते हैं। बैठकों से पहले पृथक कक्ष, सेटअप, हार्डकॉपी, कक्ष की मांगें रखी जाती हैं । जैसे पृथक कक्ष, सेटअप, हार्डकॉपी, कक्ष उपलब्ध न होना और यदि उन्हें पूरा न किया जाए तो बैठक निरस्त कर दी जाती है। उक्त व्यवधानों के चलते न केवल परियोजनाओं का समय-सीमा में निराकरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि शासन की प्रतिष्ठा, राजस्व तथा औद्योगिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

निराकरण से २३६ मामले सुलझे

नियमानुसार ई आई ए अधिसूचना 2006 के पैरा 8 (3) के परिपालन में निराकृत करवाने का परिणाम है जिससे 236 लंबित पेंडिंग केसों के निराकरण से आवेदकों ने राहत की सांस ली है जिससे वे अपना व्यापार करने अग्रसर हैं।

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