मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की तैयारी, दो दिन के अंदर लाया जा सकता है विधानसभा में विधेयक

मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की तैयारी, दो दिन के अंदर लाया जा सकता है विधानसभा में विधेयक
_ आधा दर्जन मंत्री सहित 40 विधायक बैठक में हुए शामिल
भोपाल, यश भारत । प्रदेश में पहली बार मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक पहल के तहत, मंदिरों की आय से गुरुकुलों की स्थापना और मंदिरों की समुचित देखरेख सुनिश्चित करने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
राजधानी भोपाल में हाल ही में विधायक दल की विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें मठ-मंदिरों के भविष्य, उनके संचालन और परंपरागत व्यवस्थाओं की पुनर्स्थापना को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक में विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष पदाधिकारी, प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष और लगभग आधा दर्जन मंत्री सहित 40 विधायक उपस्थित रहे।
विधानसभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी
विश्व हिंदू परिषद के प्रस्ताव पर आधारित इस योजना के तहत, प्रदेश सरकार अगले एक या दो दिनों में एक विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत कर सकती है, जिसमें सभी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का प्रावधान शामिल होगा।
सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक के पारित होते ही एक नया मंदिर ट्रस्ट गठित किया जाएगा, जिसमें विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्थानीय पुजारियों को भी सदस्य बनाया जाएगा।
मंदिरों की आय से होगा गुरुकुलों का संचालन
प्रस्तावित योजना के अनुसार, मंदिरों से प्राप्त दान और आय का उपयोग पारंपरिक गुरुकुलों की स्थापना और संचालन के लिए किया जाएगा। इससे न केवल वैदिक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मंदिरों की प्राचीन गरिमा और धार्मिक परंपराएं भी पुनर्स्थापित होंगी। इसके अलावा, मंदिर परिसरों की सुरक्षा, संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों के संचालन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सरकार को अभी तक लाखों रुपये की होती है आय
फिलहाल प्रदेश सरकार को मंदिरों से प्रतिवर्ष लाखों रुपये की आय होती है। परंतु, धार्मिक संगठनों और संत समाज की वर्षों से यह मांग रही है कि मंदिरों की संपत्तियों और आय का उपयोग सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए। इसी भावना के तहत अब मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।






