राज्यसभा नामांकन विवाद पर तेज हुई सियासी जंग रामेश्वर शर्मा की कांग्रेस को नसीहत विरोध करें, लेकिन कानून की सीमा में रहें

राज्यसभा नामांकन विवाद पर तेज हुई सियासी जंग
रामेश्वर शर्मा की कांग्रेस को नसीहत विरोध करें, लेकिन कानून की सीमा में रहें
भोपाल, यश भारत। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने के बाद प्रदेश की राजनीति में माहौल गरमा गया है। कांग्रेस इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताते हुए विरोध प्रदर्शन कर रही है, जबकि भाजपा इसे कांग्रेस की प्रक्रियागत चूक का परिणाम बता रही है। इसी बीच भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस के रवैये और नेताओं की बयानबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि नामांकन खारिज होने के पीछे किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं बल्कि दस्तावेजों में हुई त्रुटियां और निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जाना कारण है। उन्होंने कहा कि अपनी प्रशासनिक कमियों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई जाए। कांग्रेस नेताओं को अपनी भाषा और आचरण में संयम बरतना चाहिए। भाजपा विधायक ने कांग्रेस नेताओं के बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक पदों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणियां लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं लेकिन सार्वजनिक जीवन में मर्यादा का पालन जरूरी है शर्मा , शर्मा ने यह भी कहा कि यदि विरोध प्रदर्शन की आड़ में कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की गई तो प्रशासन आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश की शांति और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक विफलता को लोकतंत्र के संकट के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय आत्मविश्लेषण करना चाहिए। लोकतंत्र में कानून सर्वोपरि है और सभी राजनीतिक दलों को संविधान के दायरे में रहकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए। राज्यसभा नामांकन विवाद अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस जहां इसे जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है वहीं भाजपा इसे विपक्ष की संगठनात्मक कमजोरी और लापरवाही का उदाहरण बताकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है तथा विधानसभा से लेकर सड़क तक इसकी गूंज सुनाई दे सकती है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।







