जबलपुरमध्य प्रदेश

इंटीरियर डेकोरेटर स्ट्रक्चर मेकर्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत

पुलिस ने मामले में शुरू की जांच

जबलपुर, यशभारत। राइट टाउन स्थित इंटीरियर डेकोरेशन और निर्माण कार्य करने वाली कंपनी स्ट्रक्चर मेकर के खिलाफ संगम कॉलोनी निवासी निखिल भट्ट ने पुलिस में लिखित शिकायत करते हुए कहा है की कंपनी ने अनुबंध के हिसाब से कार्य नहीं किया और जब बाकी पैसा वापस मांगे तो तो उल्टे उनसे ही पैसा मांगने लगे पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है

संगम कॉलोनी निवासी निखिल भट्ट में कोतवाली पुलिस में दिए गए लिखित आवेदन में आरोप लगाया है कि स्ट्रक्चर मेकर जो अपने आप को इंटीरियर डेकोरेटर और निर्माण कंपनी बताती है से अपने घर के नवीनीकरण कार्य करने की बातचीत की। इसके बाद कंपनी के सेल्स एग्जीक्यूटिव अभिषेक जॉन तथा एक अन्य व्यक्ति घर आए और ये बताया कि ग्यारह हजार रुपया जमा करने पर साइट विजिट और नाप जोख की प्रक्रिया शुरू की जाएगी इसके बाद कंपनी के डायरेक्टर सिद्धार्थ खरे, अनुराग माहुरकर, और सिमर कालरा उनके घर आए और सिमर कालरा ने बतौर एडवांस पांच लाख रुपए मांगे कंपनी पर भरोसा कर उन्होंने चेक के माध्यम से पांच लाख रुपए अदा कर दिए लेकिन काम शुरू नहीं हुआ बार बार कहने के बाद पांच दिनों बाद काम शुरू किया गया लेकिन काम की गति धीमी थी जिसको लेकर बार बार विवाद की स्थिति बनती थी ।

शिकायत में कहा गया है अनुबंध के हिसाब से पूरे मकान के कार्य के लिए पैंतालीस दिनों का समय दिया गया था लेकिन आधा काम साठ दिनों में पूरा हो पाया और वो भी लगातार मेसेज करने के बाद। जिससे परेशान होकर उन्होंने बाकी का काम न करवाने का फैसला किया। अनुबंध के हिसाब से लगभग सवा तीन लाख का कार्य संपन्न हुआ था जब उन्होंने अपनी बाकी की राशि वापस मांगी तो कंपनी के डायरेक्टरों ने फोन उठाना और मेसेज का उत्तर देना बंद कर दिया और जब उन्हें कानूनी नोटिस दिया तन कंपनी ने उल्टे उनसे ही लगभग दो लाख रुपए मांग लिए और कहा कि लगभग छह लाख का काम हो चुका है इसके अलावा ये भी कह दिया कि उनका कोई अनुबंध नहीं हुआ है जबकि अनुबंध बाकायदा किया गया था जिसके कागजात कोतवाली पुलिस को आवेदन के साथ दिए गए है।

निखिल भट्ट ने अपनी शिकायत में कहा है कि कंपनी के डायरेक्टर सिद्धांत खरे, अनुराग माहुरकर, और सिमर कालरा द्वारा छलपूर्वक उन्हें धन देने के लिए प्रेरित किया गया कंपनी और उनके डायरेक्टरों के आचरण ने उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी दी है शिकायत में 13 मई 2025 को कंपनी द्वारा दिए गए फाइनल कोटेशन, 21 मई 2025 को फाइनल कॉन्ट्रेक्ट, के साथ 1 सितंबर 2025 को भेजे गए लीगल नोटिस और 15 सितंबर को लीगल नोटिस की रिप्लाई, प्रोफार्मा इनवॉइस, व्हाट्सएप ग्रुप की चैट शिकायत के साथ संलग्न की गई है शिकायत में कोतवाली थाना प्रभारी से आग्रह किया गया है कि भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।

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