मेडिकल यूनिवर्सिटी के विखंडन का विरोध तेज, नागरिक मंच ने किया विरोध प्रदर्शन
निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग

जबलपुर, यशभारत। मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रस्तावित विखंडन और उसका नाम बदलकर हेल्थ यूनिवर्सिटी किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में शहर में विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। छात्र संगठनों के साथ अब सामाजिक संस्थाएं भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ गई हैं। विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित निर्णय चिकित्सा शिक्षा, शोध और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित होगा तथा इसका सीधा असर विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों पर पड़ेगा। शुक्रवार को नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने घंटाघर चौक पर प्रदर्शन कर मेडिकल यूनिवर्सिटी के विखंडन का विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार से प्रस्तावित निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे विभाजित करना उचित नहीं है। मंच के पदाधिकारियों ने प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ला, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल तथा प्रदेश के मंत्री राकेश सिंह की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जबलपुर से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों को अपना स्पष्ट पक्ष सामने रखना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान मंच ने युवाओं, विद्यार्थियों, चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। वक्ताओं का कहना था कि मेडिकल यूनिवर्सिटी का विखंडन न केवल चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा, बल्कि शोध गतिविधियों और प्रशासनिक समन्वय पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्रस्तावित निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा विभिन्न सामाजिक और छात्र संगठनों के सहयोग से चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।







